संघ की तो शुरू से ही संविधान पर आस्था नहीं रही : कुंवर फतेह बहादुर

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भारत शुरू से धर्मनिरपेक्ष देश रहा है, यहां सभी को अपनी धार्मिक मान्यताओं को मानने का अधिकार

लखनऊ। सामाजिक संस्था बहुजन भारत के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान से साफ है कि ये संगठन संविधान पर आस्था नहीं रखता। यही कारण है कि आरएसएस हमेशा से देश को भारतीय संविधान से नहीं बल्कि गैरबराबरी वाली सामाजिक व्यवस्था के आधार पर चलाना चाहता है। उन्होंने कहा कि भारत शुरू से धर्मनिरपेक्ष देश रहा है, यहां सभी को अपनी धार्मिक मान्यताओं को मानने का अधिकार है जबकि भाजपा और आरएसएस लगातार संविधान बदलने की बात करते रहे हैं। लोकसभा चुनाव में तो भाजपा के कई प्रत्याशियों ने घोषित तौर पर बयान दिया था कि भाजपा की चार सौ से अधिक सीटें आती हैं तो भाजपा देश का संविधान बदल देगी।

भागवत का यह कहना गलत, भारत एक हिंदू राष्ट्र है, इसे संवैधानिक प्रमाण की जरूरत नहीं

दरअसल भाजपा और आरएसएस शुरू से ही संविधान विरोधी रही हैं। अब संघ प्रमुख भागवत जी के यह कह देने मात्र से कि उनका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है और उनका भाजपा से कोई लेना-देना नहीं है, यह कोई नहीं मानेगा। क्योंकि संघ की संविधान विरोधी मानसिकता से देश का बहुजन समाज पहले से ही परिचित है। कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि मोहन भागवत ने अपने बयान में कहा है कि ’भारत एक हिंदू राष्ट्र है, इसे संवैधानिक प्रमाण की जरूरत नहीं’ है। जबकि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर हिंदू राष्ट्र को भारतीय लोकतंत्र और समानता के लिए एक बड़ा खतरा मानते थे। संघ प्रमुख भागवत के बयान से यह साफ है कि इनकी विचारधारा संविधान विरोधी है और संविधान को मानने वाले लोगों को ऐसी ताकतों से सावधान रहना चाहिए और संविधान बचाने, आरक्षण बचाने की बात कर रहे लोगों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए तभी संविधान विरोधी ताकतों के हौसले पस्त होंगे।

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