विचारों का विरोध कीजिए, बेटियों का नहीं, लोकतंत्र में भाषा का संयम ही सबसे बड़ा संस्कार

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं यूपी के पूर्व राज्यमंत्री सलाहुद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि राजनीति में विचारों की लड़ाई हो सकती है, लेकिन किसी की बहन, बेटी या परिवार को निशाना बनाना कभी भी सभ्य समाज की पहचान नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि राजनीति में सहमति-असंमति हो सकती है, लेकिन राजनीति में अभद्रता, बेटियों के अपमान के लिए कोई जगह नहीं है। हमें विचारों की मर्यादा को बनाये रखना होगा।
सलाहुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि लोकतंत्र में भाषा का संयम ही सबसे बड़ा संस्कार है। हमारे देश में बेटियों को सम्मान देने की परंपरा रही है।
राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन किसी बेटी के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करना या उसे विवादों में घसीटना न तो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है और न ही मानवीय संवेदनाओं के। आइए, हम ऐसी राजनीति का समर्थन करें जहां विचारों पर बहस हो, न कि परिवारों और बेटियों की गरिमा पर प्रहार हो।
सलाहुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि अदिति यादव केवल एक राजनीतिक परिवार की सदस्य नहीं, बल्कि इस देश की एक बेटी हैं।
मतभेद होना लोकतंत्र की खूबसूरती है, लेकिन किसी महिला की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुँचाना हमारी संस्कृति, संस्कार और सामाजिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
सोशल मीडिया पर सक्रिय सभी लोगों से विनम्र अनुरोध है कि शालीनता, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का परिचय दें तथा समाज में सम्मानजनक संवाद की परंपरा को मजबूत करें।