राहुल जी के संविधान बचाने की बात करने से मायावती व भाजपा परेशान
लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज, आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने कहा कि बाबा साहेब को कांग्रेस ने भारत रत्न नहीं दिया लेकिन जो एससी,एसटी और ओबीसी को दे दिया, न कभी किसी ने दिया और न ही आगे दे सकता है। भावना और जाति के चक्रव्यूह में न फंसों और काम की बात करते हैं। 1. बाबा साहेब को संविधान सभा में चुनकर लाने वाली कांग्रेस ही थी। बाबा साहेब के विचार अलग थे तो भी कांग्रेस ने अपने सदस्य से इस्तीफा दिलाया और संविधान सभा में चुनवाकर लाई।

कांग्रेस ने बाबा साहब को संविधान निर्मात्री समिति का अध्यक्ष और कानून मंत्री बनाया
यही नहीं संविधान निर्मात्री समिति का अध्यक्ष और कानून मंत्री बनाया। गांधी जी और नेहरू जी की महानता के कारण ऐसा हो सका और अगर यह अवसर न दिया गया होता तो योग्यता के बावजूद क्या संविधान बनाने में योगदान कर सकते थे? पटेल जी नहीं चाहते थे कि एससी/एसटी के लिए संविधान में आरक्षण हो, नेहरू जी ने ही समर्थन किया वरना अभी भी ये नरक की जि़ंदगी जीते रहते। उदितराज ने कहा कि भारत रत्न तो एक खिलाड़ी- तेंदुलकर को भी मिल गया और अगर हमें भारत रत्न के एवज़ में निजी क्षेत्र में आरक्षण, उच्च न्यायपालिका में आरक्षण, समान शिक्षा , ईवीएम पर प्रतिबंध, पीएसयू के निजीकरण पर रोक, कैबिनेट सचिव, मुख्य सचिव, डीजी पुलिस और कुलपति आदि पदों पर भागीदारी मिले तो ऐसे दसों भारत रत्न $कुर्बान कर दें। हालांकि, हमें दोनों के लिए लडऩा है।

अगर कांग्रेस पार्टी ने मुफ्त सरकारी शिक्षा, वजीफा, हॉस्टल, आरक्षण, 20 सूत्रीय योजना के तहत जमीन और कोटा-परमिट में आरक्षण, एससी/एसटी कॉम्पोनेंट प्लान, एससी/एसटी एक्ट, विशेष भर्ती अभियान आदि न दिया होता तो न तो कांशीराम जी होते और न ही बीएसपी। जिन कर्मचारियों, अधिकारियों और शिक्षकों ने चंदा, सोच और धन कांशीराम जी को दिया, वह कांग्रेस की ही फसल थी। कांग्रेस की उदारता थी कि शुरू में जो इसके ऊपर कांशीराम जी आरोप लगाए उसका खंडन न किया जिसकी वजह से दलित जनाधार खिसकता गया। अगर बीएसपी पनपी तो खाद और बीज कांग्रेस का ही था। उन्होंने कहा कि मायावती जी की पोल खोलने पर आ जाएं तो मुंह नहीं दिखा पाएंगी। इनके ट्वीट/एक्स पोस्ट जो बीजेपी या मनुवादियों के समर्थन में हैं, उनकी रीच लाखों में हैं जैसे 29 जनवरी 26 ( यूजीसी नियम के विरोधवाला -13 लाख) , 6 $फरवरी ( घूसखोर पंडित 11 लाख) , जो बीजेपी के पक्ष में है- 7.3 लाख) 8 मार्च ( राष्ट्रपति के पक्ष में- 2.7 लाख) । इनकी एक भी पोस्ट जो बीजेपी के विरोध में है तो उसकी रीच कितनी है, देखें तो पता लग जाएगा। जब ख़ुद के संगठन पर पोस्ट करती हैं तो क्यों रीच हज़ारों में ही रहती है। कोई अन्धा ही होगा जो ये देखकर न कहे कि बीएसपी का बीजेपीकरण हो गया है।
बाबा साहेब ने मानसिक परिवर्तन की लड़ाई लड़ी
चार बार सीएम थीं तो लूट के अलावा क्या किया? 13 चीनी मिलों का निजीकरण किया और एससी/एसटी ऐक्ट को खत्म किया जिसको इलाहाबाद हाई कोर्ट से मैंने बचाया। अदम पैरवी में पदोन्नति में आरक्षण का मुकदमा हारा गया जब ये सीएम थीं। 2006 में कांग्रेस की सरकार से मैं मदद लेकर नागराज का मु$कदमा सुप्रीम कोर्ट में जीता और मायावती जी के निकम्मेपन के कारण उ.प्र. में वही हार गया और ठीकरा फूटा अखिलेश यादव जी पर। बाबा साहेब ने राजनीतिक परिवर्तन से अधिक सांस्कृतिक और मानसिक परिवर्तन की लड़ाई लड़ी और 14 अक्टूबर 1956 को हिंदू धर्म छोडक़र बौद्ध बने ताकि जातिविहीन समाज बने। न तो कांशीराम जी और न ही मायावती जी बौद्ध बने। ईमानदारी से देखा जाए तो बाबा साहेब की आड़ में बीएसपी ने दलितों का शोषण किया है। राहुल गांधी जी ही हैं जो संविधान और अधिकार बचा सकते हैं। एससी/एसटी और ओबीसी अगर इन्हें नहीं समझ पाए तो समझो इन्हें फिर से गुलाम बनाने से कोई रोक नहीं सकता।