नये कानून के समर्थन में सत्तापक्ष और विपक्ष के नेता एक साथ खड़े दिख रहे हैं
लखनऊ। यूजीसी का नया कानून वजूद में आने के साथ ही सवर्णों ने इसको वापस लेने की मांग को लेकर इसका तेजी से विरोध करना शुरू कर दिया है। वहीं सभी दलों के दलित व पिछड़ा वर्ग के लोग इस कानून को सख्ती से लागू कराने की मांग को लेकर मजबूती से खड़े हो गये हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज यूजीसी के इस नये कानून के पक्ष में खुलकर मैदान में आ गये हैं। दलित और पिछड़ा वर्ग के नेता चाहे वह किसी भी दल में हों इस नये कानून के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

कुल मिलाकर इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष से ऊपर उठकर यूजीसी के नये कानून के समर्थन में सत्तापक्ष और विपक्ष के नेता एक साथ खड़े दिख रहे हैं। वहीं विरोध करने वालों में सबसे ज्यादा सत्तापक्ष मुखर हैं। फिलहाल इस मुद्दे पर दलित और पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं ने सोशल मीडिया पर मोर्चा संभाल रखा है। इनका कहना है कि यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) का नया कानून वापस नहीं होगा यह अब और मज़बूती से लागू होगा! यह कानून किसी जाति के खिलाफ नहीं,किसी वर्ग के खिलाफ नहीं,किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि बराबरी के पक्ष में हैं सम्मान के पक्ष में हैं न्याय के पक्ष में हैं।
सच्चाई यह है कि वर्षों से दलित और पिछड़ा वर्ग के स्टूडेंट्स अपमान सहते रहे, उपेक्षा झेलते रहे और अलग-थलग किए जाते रहे, कभी नंबर काटकर, कभी गाइड न देकर, कभी ‘तुम यहां फिट नहीं हो’ जैसी मानसिकता थोपकर।अब जब ईओसी (इक्युवल अपारच्युनिटी सेल), ईसी (इक्युटी सेल) 24 घंटे सातों दिन शिकायत निवारण तंत्र जैसी व्यवस्थाएं लागू हो रही हैं, तो कुछ लोगों को बेचैनी क्यों हो रही है? सवाल बहुत सीधा है, अगर कानून गलत है, तो किसके लिए? और अगर कानून सही है, तो डर किसे लग रहा है?
शिक्षा कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि यह सभी कासंवैधानिक अधिकार है।
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क्योंकि चुप्पी भी अन्याय का साथ होती है।
अब नहीं रुकेंगे। अब बराबरी मिलेगी।