दलितों को फिर से गुलाम बनाने की हो रही साजिश : डॉ. उदितराज

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मनुवाद के खिलाफ ३० नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में डोमा की महारैली

कमल जयंत

लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनॉरिटीज एवं आदिवासी संगठनों का परिसंघ (डोमा) ने देश भर में हो रहे दलित उत्पीडऩ और संविधान विरोधी सरकार के खिलाफ तीस नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक महारैली का आयोजन किया है। डोमा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. उदितराज देशभर में अपने संगठन की बैठक करके दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को यह बता रहे हैं कि इस सरकार में उनके अधिकार सुरक्षित नहीं हैं। ये सरकार देश में मनुस्मृति के आधार पर गैरबराबरी वाला समाज स्थापित करना चाहती है। ताकि आजादी से पूर्व देश में दलितों और पिछड़ा वर्ग की जो दयनीय स्थिति थी और वे गुलामों की तरह अपना जीवन-यापन करने को मजबूर थे। एक बार फिर भाजपा सरकार इन वर्गों को इसी स्थिति में लाना चाहती है।

डॉ. उदितराज ने पिछले महीने लखनऊ में डोमा की एक बैठक का आयोजन किया था। इस दौरान उन्होंने दलित और पिछड़ा समाज के साथ ही अल्पसंख्यक समुदाय के सामाजिक संगठनों के लोगों से मुलाकात की थी। बातचीत में इन संगठनों ने भी राज्य में बहुजनों के साथ हो रहे अन्याय और अत्याचार की बात कही और उनकी अगुवाई में आंदोलन चलाने पर सहमति जताई।

डॉ. उदित राज का कहना है कि भाजपा की सरकार देश के संविधान को नहीं मानती, वह संविधान खत्म करके देश में मनु का कानून लागू करने की बात करती है, इस सरकार ने दलितों व पिछड़ा वर्ग को मिलने वाले आरक्षण को निष्प्रभावी कर दिया है। उनका कहना है कि यदि संविधान नहीं रहा तो दलितों और पिछड़ा वर्ग के साथ ही अल्पसंख्यक समुदाय जिन्हें भारतीय संविधान से ही सारे अधिकार प्राप्त हैं। वह खत्म हो जाएंगे।

भाजपा सरकार में तेजी से बढ़ रहीं हैं दलित उत्पीडऩ की घटनाएं

डॉ. उदित राज का कहना है कि इसलिए पहली जरूरत संविधान बचाने की है और हमें संविधान बचाने की लड़ाई लड़ रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ खड़ा होना होगा। अन्यथा की स्थिति में जिस तरह से लखनऊ में दलित समाज के दलित बुजुर्ग से मंदिर में पेशाब चटवाया गया, रायबरेली में दलित को पीट-पीटकर मार डाला गया। इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी। इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो और इस घटना के लिए दोषी व्यक्तियों को सजा मिले, इसके लिए हमें एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन चलाना होगा। डोमा इसकी शुरुआत ३० नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान से करने जा रहा है।

 

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