कांशीराम जी का बहुजन समाज और सपा का पीडीए समाज दोनों एक ही है
लखनऊ। सामाजिक संस्था बहुजन भारत के महासचिव चिंतामणि ने कहा कि आज संविधान, लोकतंत्र और आरक्षण सब खतरे में है। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज के लोगों को संवैधानिक हक़ नहीं मिल रहे हैं बल्कि उनके ये अधिकार ख़त्म किये जा रहे हैं। इन वर्गों के लिए रोजगार गायब हैं, इनकी आमदनी घट रही है और महंगाई चरम पर है।

चिंतामणि ने कहा कि बहुजन समाज के ज्यादातर लोग गरीब हैं या गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं उनका जीना मुश्किल हो गया है। चिंतामणि बहुजन भारत संस्था द्वारा आयोजित दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज के विकास में संविधान का महत्त्व पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
संस्था के लखनऊ स्थित मुख्यालय में आयोजित गोष्ठी में चिंतामणि ने कहा कि बच्चों की तकनीकी, मेडिकल की पढाई के साथ उच्च शिक्षा भी काफी महँगी हो गयी है, जिसकी वजह से बहुजन समाज के बच्चे गरीबी के कारण इससे वंचित हो रहे हैं। अभी हाल में स्पेशल कंपोनेंट योजना के तहत आजमगढ़, जालौन, कन्नौज और सहारनपुर मेडिकल कालेज बने इनमें अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चों के लिए 70 फ़ीसदी आरक्षण की व्यवस्था थी, लेकिन कोर्ट के दखल के बाद इन वर्गों के लिए दाखिले में महज 23 फ़ीसदी ही आरक्षण इन कालेजों में एससी/एसटी के बच्चों को मिल पायेगा।

यूपी में बहुजनों के खिलाफ जातीय उत्पीडन की घटनाएँ बढीं
चिंतामणि ने कहा कि यूपी में बहुजनों के खिलाफ जातीय उत्पीडन की घटनाएँ बढीं हैं, इन वर्गों की कहीं कोई सुनवाई भी नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे में बहुजनों में खासतौर पर धोबी समाज को यह तय करना होगा कि वे अपने संविधान और आरक्षण के हक़ को कैसे बचायेंगे। सत्ताधारी दल बहुजनों के अधिकारों को ख़त्म कर रहा है हमें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अपने वोट के जरिये बहुजनों की लड़ाई लड़ रहे दल की सरकार बनानी होगी तभी हम पर हो रहे अन्याय और अत्याचार रुकेंगे। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में समाजवादी पार्टी ही संविधान, लोकतंत्र और आरक्षण बचाने की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ रही है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम चुनाव में सपा का खुलकर र्सह्योग करें।
चिंतामणि ने यह भी स्पष्ट किया कि कांशीराम जी का बहुजन समाज और समाजवादी पार्टी का पीडीए समाज दोनों एक ही है। अखिलेश जी भी पीडीए समाज के जरिये पिछड़ा वर्ग, दलितों और अल्पसंख्यकों को उनका अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़ रहे हैं जिसे बसपा ने बहुत पहले ही छोड़ दिया है। इस गोष्ठी में वाराणसी, जौनपुर, बस्ती, संत कबीर नगर, चंदौली, कुशीनगर, गोंडा, बलरामपुर, गाजीपुर, मऊ, बलिया, गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, बहराइच, श्रावस्ती, अयोध्या,जिलों के मुख्य प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया और अपने विचार रखे।