​हिंदी : भारत की आत्मा और अटूट पहचान : राजीव कुमार

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​”हिंदी केवल एक भाषा नहीं, हमारी संस्कृति, हमारी विरासत और करोड़ों भारतीयों के दिल की आवाज़ है हिंदी

​ लखनऊ। डीपीआरए के प्रांतीय प्रवक्ता एवं जिला अध्यक्ष, डीपीआरए लखनऊ एवं बलरामपुर अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट राजीव कुमार ने हिंदी दिवस  पर  देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि हिंदी हमारे देश की विविधता को एक सूत्र में पिरोने वाली मुख्य कड़ी है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूर्व से लेकर पश्चिम तक, हिंदी वह माध्यम है जो करोड़ों दिलों को आपस में जोड़ता है। यह केवल बोलचाल की भाषा नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर की जीवंत संवाहक है।

​इतिहास के झरोखे से (14 सितंबर का महत्व)

​राजीव कुमार ने बताया कि 14 सितंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने सर्वसम्मति से देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया था। इसके बाद, भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के सुझाव पर 1953 से प्रतिवर्ष 14 सितंबर को ‘हिंदी दिवस’ के रूप में मनाना शुरू किया गया। यह दिन हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक, हिंदी ने जन-जागरण में क्या अद्वितीय भूमिका निभाई है।

​साहित्यिक समृद्धि : विचार और ज्ञान का सागर

​हिंदी का साहित्य अत्यंत विशाल, रसपूर्ण और ओजस्वी है।

​संत साहित्य: कबीर, तुलसी, सूरदास और मीराबाई ने अपनी रचनाओं से समाज को भक्ति, नीति और समरसता का मार्ग दिखाया।

​आधुनिक साहित्य: मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ जहाँ धरातल के सच से रूबरू कराती हैं, वहीं रामधारी सिंह ‘दिनकर’, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा की रचनाएँ राष्ट्रप्रेम और संवेदनशीलता का संचार करती हैं।

​आज के दौर में हिंदी: ज्ञान, तकनीक और विकास

​आधुनिक समय में हिंदी ने अपनी स्वीकार्यता को और व्यापक किया है। आज इंटरनेट, सोशल मीडिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल मीडिया में हिंदी की उपस्थिति तेज़ी से बढ़ी है। व्यापार, मनोरंजन और शिक्षा के क्षेत्रों में हिंदी नए आयाम गढ़ रही है, जो यह साबित करता है कि हमारी भाषा समय के साथ बदलने और समृद्ध होने में पूरी तरह सक्षम है।

​हमारा संकल्प

​”निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।”

— भारतेन्दु हरिश्चंद्र

​आइए, इस पावन अवसर पर संकल्प लें कि हम अपनी मातृभाषा पर गर्व करेंगे, इसका उपयोग दैनिक पत्राचार व संवाद में सहजता से करेंगे, और आने वाली पीढ़ियों को भी इसकी समृद्ध विरासत से जोड़े रखेंगे।

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