बहुजन आंदोलन को कमजोर करने की भाजपा की रणनीति सफल रही : रोहित नंदन

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भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने बसपा प्रमुख के जरिए दलितों और पिछड़ा वर्ग को अलग किया

कमल जयंत

लखनऊ। पूर्व आईएएस रोहित नंदन का कहना है कि भाजपा नेतृत्व ने बसपा से गठबंधन करने के साथ ही बहुजन आंदोलन को खत्म करने की कवायद शुरू कर दी थी, लेकिन भाजपा इतनी जल्दी अपने इस मिशन में सफल हो जाएगी इसका अंदाजा नहीं था। उनका कहना है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को इस बात का अंदाजा था कि बिना दलितों को जोड़े उनका सत्ता में काबिज होने का सपना पूरा नहीं होगा, इसलिए भाजपा के शीर्ष नेताओं ने मायावती जी के जरिए दलितों और पिछड़ा वर्ग को अलग करने की रणनीति पर काम करना शुरू किया।

रोहित नंदन बसपा सरकार में मायावती जी के काफी करीबी आईएएस अधिकारियों में से एक रहे हैं वह बसपा की सभी सरकारों में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे। सरकार में बहुजन समाज के हित से जुड़ी रणनीति बनाने में भी इनकी काफी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।  इस वजह से उन्हें बहुजन आंदोलन को करीब से देखने और उसे समझने का मौका मिला।

उनका कहना है कि दो जून 1995 को लखनऊ के वीआईपी गेस्ट हाउस में मायावती जी के साथ हुई घटना ने भाजपा नेतृत्व को मौका दे दिया और पार्टी नेतृत्व ने मायावती जी के सहारे मुलायम सिंह यादव और कांशीराम जी के गठबंधन को तोडक़र दलितों और पिछड़ा वर्ग के बीच मजबूत हो रही एकता को ध्वस्त कर दिया और इसके एवज में मायावती जी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए भाजपा ने बसपा को बिना किसी शर्त के समर्थन कर दिया। भाजपा नेतृत्व की इस उदारता के पीछे बहुजनों में बढ़ रही एकता को कमजोर करने की रणनीति थी । भाजपा अपनी इस रणनीति पर पूरी तरह से कामयाब होती दिख रही है।

साफ्ट हिन्दुत्व के सहारे कट्टर हिन्दूवादी दलों से नहीं लड़ा जा सकता

उन्होंने बताया कि दरअसल कांशीराम जी के असमय निधन के कारण बहुजन आंदोलन को बसपा प्रमुख आगे नहीं बढ़ा पायीं और दुर्भाग्यवश यह आंदोलन आगे बढऩे के बजाय रुक गया। जेल जाने के डर और लालच के कारण मायावती जी बहुजनों को एकजुट करने व दलितों पर हो रहे उत्पीडऩ के खिलाफ कोई मुखर आंदोलन नहीं चला सकीं। उनका कहना है कि साफ्ट हिन्दुत्व के सहारे कट्टर हिन्दूवादी दलों से नहीं लड़ा जा सकता है।

जबसे भाजपा-बसपा गठबंधन का दौर शुरू हुआ तबसे बसपा का ग्राफ गिरना शुरू हो गया

भाजपा अपने कट्टर हिन्दुत्व की रणनीति में सफल होती दिख रही है। दलितों में भी कुछ जातियां मुस्लिमों के खिलाफ काफी उग्र होकर सामने आती दिख रहीं हैं। इन्हें भाजपा के कट्टर हिन्दुत्व के जाल में फंसने से बचाने के लिए बहुजनों को जोडऩे और उनमें भाईचारा स्थापित करने के लिए जो निरंतर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा था, वह बंद हो गया है। साथ ही जबसे भाजपा-बसपा गठबंधन का दौर शुरू हुआ तबसे बसपा का ग्राफ गिरना शुरू हो गया, जिसकी वजह से यूपी में बहुजन आंदोलन भी काफी कमजोर हुआ है। रोहित नंदन का कहना है कि भाजपा के हिन्दुत्व को शिकस्त देने के लिए बहुजन आंदोलन की बात कर रहे सियासी दलों खासतौर पर बसपा नेतृत्व को बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के बुद्धिज्म में जाना होगा। यदि मायावती जी बुद्धिज्म को बढ़ातीं तो दलित भाजपा के हिन्दुत्व के जाल में न फंसता।

 

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