यूपी में मुस्लिम लीडरशिप विकसित करने की तैयारी में सपा

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आजम के बाद राज्य स्तर के बजाय जिला स्तर पर मुस्लिम चेहरे स्थापित करेगी पार्टी

कमल जयंत

लखनऊ। यूपी में अगले साल की शुरुआत में कभी भी विधानसभा के चुनाव की घोषणा हो सकती है। इसको ध्यान में रखकर समाजवादी पार्टी ने सियासी कील-कांटे दुरुस्त करने शुरू कर दिये हैं। पार्टी के गठन के साथ ही यादव और मुस्लिम समाज सपा का आधार वोट रहा है। मुस्लिम समाज शुरू में पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ एकतरफा जुड़ा रहा। हालांकि मुलायम सिंह ने मुस्लिम समाज से आजम खान और अहमद हसन जैसे नेताओं को मुस्लिमों की कयादत सौंपी, लेकिन वास्तविकता यही रही कि मुस्लिम समाज इन मुस्लिम नेताओं के साथ ही पार्टी से ज्यादा जुड़ा रहा।

मौजूदा राजनीतिक हालात में सपा के पास कोई बड़ा मुस्लिम चेहरा नहीं है।आजम खान जेल में हैं और अहमद हसन का निधन हो चुका है। देखा जाए तो पार्टी में स्थानीय स्तर पर मुस्लिम नेताओं की कमी नहीं है और हाल ही में नसीमुद्दीन सिद्दीकी भी सपा में शामिल हो गये हैं।

हाल-फिलहाल नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में बड़ा मुस्लिम चेहरा हैं। बावजूद इसके पार्टी नेतृत्व स्थानीय स्तर पर अन्य मुस्लिम नेताओं को प्रोजेक्ट कर रहा है। ताकि विधानसभा चुनाव के दौरान मुस्लिम समाज को यदि जरूरत पड़े तो वे इन नेताओं के जरिए भी राष्ट्रीय नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचा सके।

लखनऊ जिले में सलाहउद्दीन सिद्दीकी भी पार्टी का बड़ा चेहरा बनकर उभरे

वैसे तो पार्टी में मुस्लिम नेताओं की कमी नहीं है, फिर भी सपा प्रमुख अखिलेश यादव स्थानीय स्तर पर मुस्लिम नेताओं को पार्टी में शामिल करके उन्हें तरजीह दे रहे हैं। उनके राजनीतिक व निजी कार्यक्रमों में शिरकत भी कर रहे हैं। इससे इन नेताओं का अपने समाज में भी कद बढ़ रहा है और पार्टी को भविष्य में इसका फायदा भी होता दिख रहा है। हाल फिलहाल तो लखनऊ में बसपा से नाता तोड़कर आने वाले मुस्लिम नेताओं में नसीमुद्दीन सिद्दीकी के अलावा सलाहउद्दीन सिद्दीकी का नाम भी शामिल है। सलाहउद्दीन सिद्दीकी ने अपने समर्थकों के साथ बसपा का दामन छोडक़र पार्टी के राष्टï्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा की सदस्यता ग्रहण की थी। लंबे समय तक बसपा मूवमेंट से जुड़े रहे सलाहउद्दीन सिद्दीकी को संगठन में काम करने और संगठन को मजबूत करने के लिए सपा के पीडीए समाज के मुताबिक इन वर्गों में भाईचारा स्थापित करने का लंबा अनुभव है।

बसपा से लखनऊ जिले के बख्शी का तालाब विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के कारण सलाहउद्दीन का इस विधानसभा क्षेत्र में खासा प्रभाव भी है

हालांकि सपा में उन्हें संगठन में कोई जिम्मेदारी नहीं मिली है, लेकिन वे सपा के पीडीए समाज के विस्तार के लिए लखनऊ जिले में काम कर रहे हैं। 2022 में बसपा से लखनऊ जिले के बख्शी का तालाब विधानसभा सीट से चुनाव लडऩे के कारण इनका इस विधानसभा क्षेत्र में खासा प्रभाव भी है।

बसपा के कमजोर जनाधार के बावजूद इस चुनाव में सलाहउद्दीन सिद्दीकी को 35 हजार वोट मिले थे। फिलहाल सिद्दीकी लखनऊ में पीडीए समाज में भाईचारा स्थापित करने के अभियान में जुटे हुए हैं और पार्टी नेतृत्व भी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सभी विधानसभा सीटों में ब्लाक स्तर तक पीडीए समाज की भाईचारा समिति स्थापित करना चाहता है।

वैसे सलाहउद्दीन सिद्दीकी को बसपा में समय-समय पर राज्य के विभिन्न मंडलों में कोआर्डिनेटर पद की जिम्मेदारी भी दी गयी। यूपी के अधिकांश मंडलों की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही 2014 में बसपा ने इन्हें पूर्वी यूपी में मुस्लिम समाज को जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी। मुस्लिम भाईचारा की जिम्मेदारी निभाते हुए सलाहउद्दीन ने पूर्वांचल के जिलों में मुस्लिमों को बसपा से जोडऩे में अहम भूमिका निभायी।

हालांकि लखनऊ में फाखिर सिद्दीकी सपा के महानगर अध्यक्ष हैं, इसके अलावा फखरुल चांद पार्टी के प्रवक्ता हैं और सपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठï के प्रदेश अध्यक्ष शकील नदवी हैं।

सपा का पश्चिमी यूपी में मुस्लिमों में खासा जनाधार है और पार्टी ने यहां से लोकसभा व विधानसभा चुनाव में मुस्लिम उम्मीदवार भी उतारे लोकसभा में इकरा हसन, जियाउररहमान बर्क और मोहिबुल्ला नदवी सांसद हैं।

इसके अलावा पूर्वांचल में गाजीपुर से अफजाल अहमद सांसद हैं। पार्टी इन नेताओं के साथ ही स्थानीय स्तर पर पीडीए समाज के तहत नयी मुस्लिम लीडरशिप भी तैयार करने में जुटी है। ताकि मुस्लिम समाज किसी एक नेता की वजह से नहीं बल्कि जिलों-जिलों में स्थानीय नेताओं के साथ पार्टी से मजबूती से जुड़ा रहे।

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