चन्द्रशेखर ने पूर्व मंत्री डॉ. मसूद अहमद को दिलायी आजाद समाज पार्टी की सदस्यता

लखनऊ। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में नगीना सांसद एवं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि यह चोरी नहीं, लूट और डकैती है।
आपको मोहम्मद बिन कासिम, मोहम्मद गोरी याद है, नहीं याद है आपको? मोहम्मद गजनी याद है, नहीं याद है? वो तो एक बार, दो बार, तीन बार ही मंदिर लूटे, लेकिन यहां तो भाजपा ने पाइपलाइन बिछा दी। राम के नाम पर वोट भी ले रहे हैं, राम के नाम पर नोट भी ले रहे हैं और राम के नाम पर लोगों की आस्था को चोट भी दे रहे हैं।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि भाजपा ने आस्था को व्यापार बना दिया और आप नहीं देखना चाहते या नहीं चर्चा चाहते, तो जमीन पर जाकर देखिए।
गांव में लोग भारतीय जनता पार्टी के लोगों को घुसने नहीं देंगे। ये जो सत्ता बैठी है, ये और जो मुख्य अपराधी हैं, उनको बचाने की जो कसौटी है, ये सरकार को भारी पड़ेगी। चंद्रशेखर आज लखनऊ में थे और उन्होंने प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. मसूद अहमद को अपनी पार्टी का पटका पहनाकर सदस्यता दिलाई।

जो कह रहे हैं पर्ची निकालकर बता देंगे, वो डरे हुए हैं कि हमें निपटा दिया जाएगा, आप समझो कि मुकाबला किनसे है?
मैं फैक्ट पर बात करूंगा, मैं तो वकील हूं। कहां हैं वह ईंटें? मिल गईं? …तो जनता के प्रेशर में अभी बहुत कुछ निकलेगा। आप और मैं सब जानते हैं, पर डरते हैं, जैसे वो बागेश्वर साहब डर रहे हैं ना। क्या कह रहे हैं वो? कि पर्ची निकाल दूंगा तो मुझे निपटा देंगे। आप ये समझो, जो ठेकेदार हैं, उनमें इतना डर है। जो कह रहे हैं पर्ची निकालकर बता देंगे, वो डरे हुए हैं कि हमें निपटा दिया जाएगा। आप समझो कि मुकाबला किनसे है?
बहुजन मूवमेंट से जुड़े लोग आ रहे हमारे साथ
चंद्रशेखर ने कहा- आज बड़ा महत्वपूर्ण दिन है। प्रदेश की राजधानी में हमारी पार्टी के सीनियर नेताओं भाई दानी, सतपाल भाई, रामेश्वर पवन, यशवंत मौर्या, डॉ. आकिफ साहब, नीत भाई के प्रयासों से बहुजन मिशन के बहुत पुराने पिलर, मान्यवर कांशीराम साहब के सान्निध्य में जिन्होंने संघर्ष किया, वो आज हमारे साथ आ रहे हैं।
कल जब हम रात बैठे थे एक साथ में, तो इन्होंने (डॉ. मसूद अहमद ने) एक घटना का जिक्र किया कि एक बार मैं साहब (कांशीराम) के साथ ट्रेन से आ रहा था। मैंने उनसे बताया कि ये जो बस्ती, खलीलाबाद वाली जो बेल्ट है, ये बहुजन मूवमेंट की बहुत उपजाऊ बेल्ट है। यहां दलित, पिछड़े, मुसलमान बहुसंख्यक हैं।
इस पर साहब (कांशीराम) ने इनसे (मसूद अहमद से) कहा कि आप ही खलीलाबाद उतर जाओ। ये 3 महीने खलीलाबाद में ही घूमते रहे और बामसेफ के साथियों के सहयोग से इन्होंने वहां आंदोलन खड़ा किया और परिणाम ये हुआ कि जब वहां चुनाव लड़े, तो नीला झंडा जो बहुत मजबूत नहीं था, उसे 45,000 वोट मिले।

उस समय भरोसा था, आज तो वोट दूसरे से लो, चले जाओ दूसरे में
चंद्रशेखर ने कहा- उस बात से मैं यह महसूस कर रहा था कि वह पुराना आंदोलन था। आज तो साधन हैं, संसाधन हैं, मीडिया भी कवर करता है, तब तो कुछ भी नहीं था। तब तो आदमी-आदमी से जाकर बात करता था, अपनी बात कहता था, विचारधारा के आधार पर समझाता था। जो लोग समझ जाते थे, वो साथ खड़े हो जाते थे।
जो साथ खड़े हो जाते थे, फिर वो तोड़ने से टूटते नहीं थे। आज तो भरोसा भी नहीं है कि जीतकर आओगे किसके वोट से और कौन सी पार्टी में चले जाओगे। आज के हालात तो आप देख ही रहे हैं।
पहले सांसद, विधायक टूटते थे, आज पार्टियां टूट रही हैं
पहले यहां राज्यसभा चुनाव में आपने देखा कि विपक्ष की एक पार्टी के 8 एमएलए चले गए, सत्ताधारी पार्टी के राज्यसभा मेंबर को वोट दे दिया। फिर आपने दिल्ली की एक पार्टी का हाल देखा, 10 में से 7 राज्यसभा के मेंबर जो हैं, वो उसी पार्टी में चले गए जिसके खिलाफ थे।
अभी बंगाल में जो हो रहा है, वो भी किसी से छिपा हुआ नहीं है। तो पहले तो आदमी टूटता था, अब तो पार्टियां टूट रही हैं। ऐसे समय में जहां इतने विकल्प हैं, डॉ. मसूद साहब और उनके साथियों ने विश्वास आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और उसकी नीतियों में दिखाया है।