उर्दू अदब और फ़िल्मी जगत को अपूरणीय क्षति
मशहूर और मारूफ़ फ़िल्मी नग़मा-निगार, वरिष्ठ शायर एवं लेखक अहमद वसी साहब के निधन से उर्दू साहित्य और फ़िल्मी जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके इंतकाल को साहित्य, संस्कृति और सिनेमा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। अहमद वसी साहब के निधन पर रूबरू फाउंडेशन की ओर से एक शोक सभा का आयोजन इरशाद राही 95 जगदीश चंद्र बोस मार्ग लखनऊ के घर किया गया, जिसमें साहित्यकारों, कवियों, लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कला प्रेमियों ने भाग लेकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सभा में उनके रचनात्मक योगदान, मानवीय दृष्टि और अदबी विरासत पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। शोक सभा को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध शायर एवं लेखक इरशाद राही ने गहरे शोक का
इज़हार किया। उन्होंने कहा कि अहमद वसी साहब के निधन की ख़बर ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी झकझोर कर रख दिया है। इरशाद राही ने बताया कि महज़ पाँच दिन पहले ही अहमद वसी साहब से उनकी फ़ोन पर बातचीत हुई थी, जिसके दौरान उन्होंने पूरे स्नेह और आत्मीयता के साथ उनकी कहानी की किताब “ख़ला” पर अपना तब्सिरा लिखकर भेजा था। इरशाद राही ने कहा, “यह विश्वास कर पाना कठिन है कि जिन शब्दों में आज भी उनका अपनापन, उनकी हौसला-अफ़ज़ाई और जीवंतता महसूस होती है, वही शख़्स आज हमारे बीच मौजूद नहीं है।” 
उन्होंने आगे कहा कि अहमद वसी साहब केवल एक बड़े रचनाकार ही नहीं थे, बल्कि वे इंसानियत, संवेदना और मोहब्बत की एक जीवंत मिसाल थे। उनके नग़मों और शायरी में जहाँ दर्द की सच्चाई थी, वहीं उम्मीद और रोशनी का संदेश भी था। जीवन को देखने का उनका नज़रिया गहरा, संवेदनशील और मानवीय था। सभा में वक्ताओं ने कहा कि फ़िल्मी नग़मा-निगारी के क्षेत्र में अहमद वसी साहब ने भावनाओं को आवाज़ दी, जबकि उर्दू अदब में उनकी रचनाओं ने समाज, इंसान और समय की सच्ची तस्वीर पेश की। उनका जाना साहित्य और सिनेमादोनों के लिए एक गहरी क्षति है। अंत में रूबरू फाउंडेशन की ओर से दिवंगत आत्मा की मग़फ़िरत के लिए प्रार्थना की गई। इरशाद राही ने दुआ करते हुए कहा कि ईश्वर अहमद वसी साहब को जन्नतुल फ़िरदौस में उच्च स्थान प्रदान करे और उनके परिवार व चाहने वालों को यह दुःख सहने की शक्ति दे।