समाज के हर वर्ग से योग को अपनी दैनिक जीवन शैली का अनिवार्य हिस्सा बनाने की अपील

लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के शुभ अवसर पर डीपीआरए यूपी के प्रांतीय प्रवक्ता, लखनऊ जिला अध्यक्ष एवं पूर्व सदस्य, फार्मेसी काउंसिल उत्तर प्रदेश (चीफ फार्मासिस्ट, बलरामपुर चिकित्सालय, लखनऊ) राजीव कुमार ने प्रदेश व देशवासियों को योग दिवस की हार्दिक बधाई दी। इस अवसर पर उन्होंने समाज के हर वर्ग से योग को अपनी दैनिक जीवन शैली का अनिवार्य हिस्सा बनाने की पुरजोर अपील की।
योग तन और मन को जोड़ने का विज्ञान : राजीव
प्रेस को जारी संदेश में राजीव कुमार ने कहा कि “योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः” अर्थात मन की चंचलता को शांत करना ही योग है। आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी, व्यावसायिक दबाव और लगातार बढ़ते मानसिक तनाव के बीच योग ही एक ऐसा एकमात्र सशक्त माध्यम है जो हमें आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि योग केवल शारीरिक कसरत या आसनों का समूह नहीं है, बल्कि यह हमारे तन, मन और आत्मा को एक सूत्र में पिरोने का प्राचीन भारतीय विज्ञान है।

राजीव कुमार ने गिनाए योग के चमत्कारी फायदे
समाज को जागरूक करते हुए उन्होंने विस्तार से बताया कि नियमित योग करने से शरीर और मस्तिष्क को क्या-क्या अद्भुत लाभ मिलते हैं:
तनाव और एंग्जायटी से मुक्ति: प्राणायाम (जैसे अनुलोम-विलोम, भ्रामरी) और ध्यान (Meditation) के जरिए कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर कम होता है, जिससे मानसिक शांति मिलती है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) में वृद्धि: नियमित योगासन करने से शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली मजबूत होती है, जिससे मौसमी बीमारियों और संक्रमणों से बचाव होता है।
हृदय स्वास्थ्य और रक्त संचार में सुधार: योग से रक्त का संचार (Blood Circulation) बेहतर होता है, जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और दिल की बीमारियां दूर रहती हैं।
लचीलापन और शारीरिक मजबूती: जोड़ों के दर्द, रीढ़ की हड्डी की समस्याओं और मांसपेशियों की जकड़न को दूर करने में योग बेहद कारगर है। यह शरीर को ऊर्जावान और लचीला बनाए रखता है।
मधुमेह और मोटापे पर नियंत्रण: कपालभाति और विशिष्ट आसन मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त कर वजन संतुलित रखने और इंसुलिन के स्तर को सुधारने में मदद करते हैं।

हर व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में शामिल करनी चाहिए ये बातें
राजीव कुमार ने समाज के हर नागरिक, युवाओं और बुजुर्गों से आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण के लिए हर व्यक्ति को प्रतिदिन निम्नलिखित नियमों का पालन जरूर करना चाहिए।
सुबह का संकल्प : प्रतिदिन सुबह कम से कम २० से ३० मिनट का समय योग, स्ट्रेचिंग और प्राणायाम के लिए अवश्य निकालें।
सांसों पर नियंत्रण: दिन में कुछ मिनट शांत बैठकर गहरी सांसें (Deep Breathing) लें, जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है।
संतुलित जीवन : योग के साथ-साथ सात्विक आहार, उचित विश्राम और सकारात्मक सोच को अपनी आदत बनाएं।
उन्होंने अंत में “शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्” सूक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा शरीर ही सभी कर्तव्यों को पूरा करने का पहला साधन है। यदि शरीर स्वस्थ रहेगा, तो विचार स्वस्थ होंगे, और विचारों के स्वस्थ होने से ही एक समृद्ध समाज और सशक्त भारत का निर्माण संभव है। आइए, इस योग दिवस पर हम सब मिलकर ‘करो योग, रहो निरोग’ के संकल्प को चरितार्थ करें।