आरएसएस द्वारा दिए गये दायित्वों का निर्वहन करने के पश्चात बसपा छोड़कर अपने मूल कैडर में वापस चले गये

लखनऊ। विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े समाजसेवी अशोक कुमार का कहना है कि बसपा शासन 2007-12 की अवधि में रहे मंत्री,सांसद, विधायक, को- आरडिनेटर जो निकले या निकाले गए तथा इसी अवधि में कार्यरत उच्च अधिकारी जो सेवानिवृत्त हुए,इन सब के अन्य राजनैतिक दलों में जाने का पैटर्न अपवादों के साथ निम्न प्रकार दिखता है:-
1- बसपा सरकार में रहे लगभग सभी सवर्ण मंत्री, सांसद, विधायक आदि पार्टी से निकले या निकाले जाने पर हिंदुत्ववादी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये। इसे इस तरह देखना चाहिए कि ये सब बसपा में प्रति नियुक्ति पर आये थे ओर संघ द्वारा दिए गये दायित्वों का निर्वहन करने के पश्चात अपने मूल कैडर में वापस हो गये।
2- बसपा सरकार में रहे बहुजन समाज के मंत्री, सांसद, विधायक आदि अपेक्षाकृत धर्म निरपेक्ष दलों – कांग्रेस, समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। इनमें से अधिकांश कांशीराम जी के तैयार किये गये पुराने कार्यकर्ता रहे।
3- दलित समाज के IAS/IPS व उच्च अधिकारी ( कुंवर फतेह बहादुर जी IAS व कुछेक अन्य अधिकारियों को छोड़कर ) जो बहन जी के शासनकाल में अत्यंत महत्वपूर्ण पदों पर रहे, सेवानिवृत्ति के बाद ये सभी अपनी महत्वाकांक्षा व निजी आर्थिक हितों के चलते भाजपा में शामिल हो गये।
वैसे ये अधिकारी कभी भी दलित समाज के हितैषी या अम्बेडकरवादी नहीं रहे। ये ऐसा एक भी उदाहरण प्रस्तुत नहीं कर सकते हैं, जब इन्होंने आम दलित वर्ग (अपवाद छोड़कर) के साथ न्याय किया हो। अगर इनके पास कोई उदाहरण है तो सार्वजनिक कर सकते हैं।