रेबीज: असावधानी से जानलेवा, सही समय पर उपचार से 100% बचाव संभव : राजीव कनौजिया

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रेबीज के वैज्ञानिक पहलुओं, इसके लक्षणों और इसके तुरंत प्राथमिक उपचार की सही जानकारी ही इस बीमारी के खिलाफ हमारा सबसे बड़ा हथियार

लखनऊ। डीपीआरए के प्रांतीय प्रवक्ता व लखनऊ के जिला अध्यक्ष राजीव कनौजिया का कहना है कि ​चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ आम जनमानस को गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूक करना भी हम सभी स्वास्थ्य पेशेवरों का परम कर्तव्य है।

इसी क्रम में, आज हम एक ऐसी घातक बीमारी के बारे में विस्तार से बात करेंगे जो थोड़ी सी भी लापरवाही होने पर पूरी तरह जानलेवा साबित होती है—रेबीज (Rabies)।

 रेबीज क्या है और यह कैसे फैलता है? (What is Rabies & Transmission)

​रेबीज एक अत्यंत खतरनाक वायरल बीमारी है जो लार (Saliva) के माध्यम से फैलती है। यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित (पागल) जानवरों के काटने, खरोंचने या उनके द्वारा शरीर पर पहले से मौजूद किसी खुले घाव को चाटने से इंसानों के शरीर में प्रवेश करता है। भारत में लगभग 99% मामले संक्रमित कुत्तों के काटने से होते हैं। इसके अलावा बिल्ली, बंदर, सियार, लोमड़ी और चमगादड़ के माध्यम से भी यह वायरस फैल सकता है। शरीर में प्रवेश करने के बाद यह वायरस नसों के रास्ते सीधे हमारे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) यानी रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क (Brain) पर हमला करता है, जिससे मस्तिष्क में गंभीर सूजन आ जाती है।

रेबीज के लक्षण (Symptoms of Rabies)

​जानवर के काटने के बाद वायरस को दिमाग तक पहुँचने में 2 से 3 महीने (कभी-कभी कुछ हफ़्तों से लेकर एक साल तक) का समय लग सकता है। इसे इन्क्यूबेशन पीरियड कहते हैं। ​जब इस बीमारी के लक्षण एक बार दिखाई देने लगते हैं, तो दुनिया में इसका कोई इलाज नहीं है और मरीज की मृत्यु निश्चित हो जाती है। इसके मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:
​शुरुआती लक्षण: काटने वाली जगह पर अत्यधिक खुजली, झुनझुनी, दर्द या जलन होना। इसके साथ ही हल्का बुखार और सुस्ती आना।
​हाइड्रोफोबिया (Hydrophobia – पानी से डर लगना): यह रेबीज का सबसे प्रमुख और डरावना लक्षण है। मरीज को पानी देखने, उसकी आवाज सुनने या पानी पीने की कोशिश करने पर गले की मांसपेशियों में बेहद तीव्र और दर्दनाक ऐंठन (Spasms) होने लगती है।
​एयरोफोबिया (Aerophobia – हवा से डर): चेहरे पर हवा का हल्का झोंका आने या तेज रोशनी होने पर भी मरीज अत्यधिक घबरा जाता है।
​व्यवहार में आक्रामकता: मरीज अत्यधिक उत्तेजित हो जाता है, भ्रम (Confusion) की स्थिति में रहता है, मुंह से अत्यधिक लार बहती है और वह हिंसक व्यवहार करने लगता है।
​लकवा (Paralysis) व कोमा: अंतिम अवस्था में शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं, मरीज कोमा में चला जाता है और सांस रुकने से उसकी मृत्यु हो जाती है।

जानवर के काटने पर तत्काल क्या करें? (Immediate First Aid)

​एक स्वास्थ्य पेशेवर के रूप में मेरी सलाह है कि जानवर के काटने के तुरंत बाद के पहले 15 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि कोई संदिग्ध जानवर काट ले, तो तुरंत ये कदम उठाएं

​साबुन और पानी से धोएं (सबसे महत्वपूर्ण): घाव को तुरंत नल के बहते हुए पानी (Running Water) के नीचे रखें और कपड़े धोने वाले या नहाने वाले साबुन से कम से कम 10 से 15 मिनट तक अच्छी तरह रगड़कर धोएं। साबुन में मौजूद तत्व रेबीज के वायरस की बाहरी परत को नष्ट कर देते हैं।

​एंटीसेप्टिक का उपयोग: धोने के बाद घाव पर पोविडोन-आयोडीन (Povidone-Iodine), स्पिरिट या अल्कोहल आधारित कोई भी एंटीसेप्टिक लगाएं।

घाव को खुला रखें: रेबीज के घाव पर कभी भी तुरंत पट्टी (Bandage) न बांधें और न ही टांके (Stitches) लगवाएं। घाव को खुला छोड़ने से वायरस को अंदर फैलने में रुकावट आती है।

संपूर्ण बचाव: एंटी-रेबीज टीकाकरण (Prevention & Vaccination)

​रेबीज से बचने का एकमात्र उपाय शत-प्रतिशत टीकाकरण है। डॉक्टर की सलाह पर निम्नलिखित प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए

एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV): जानवर के काटने के तुरंत बाद डॉक्टर द्वारा निर्धारित दिनों पर वैक्सीन के टीके लगवाएं। आधुनिक शेड्यूल के अनुसार, यह टीके 0, 3, 7, 14 और 28वें दिन पर लगाए जाते हैं। (काटने वाले दिन को 0 दिन माना जाता है)।

​रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) : यदि घाव बहुत गहरा है या खून निकला है (Category 3 Bite), तो सिर्फ वैक्सीन काफी नहीं होती।

ऐसी स्थिति में घाव के अंदर और उसके आस-पास तुरंत ‘रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन’ का इंजेक्शन दिया जाता है, जो रेबीज वायरस को तुरंत बेअसर करने का काम करता है। राजीव कनौजिया ने कहा कि ​बलरामपुर अस्पताल, लखनऊ के मुख्य फार्मासिस्ट और उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल के पूर्व सदस्य के रूप में, मेरा यह मानना है कि रेबीज के वैज्ञानिक पहलुओं, इसके लक्षणों और इसके तुरंत प्राथमिक उपचार की सही जानकारी ही इस बीमारी के खिलाफ हमारा सबसे बड़ा हथियार है।

​मेरी अपील और संदेश

​”रेबीज लाइलाज जरूर है, लेकिन यह पूरी तरह से रोकथाम योग्य (Preventable) है। बलरामपुर चिकित्सालय, लखनऊ के मुख्य फार्मासिस्ट, DPRA लखनऊ के जिला अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल के पूर्व सदस्य होने के नाते, मैं लखनऊ जनपद सहित प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील करता हूँ कि किसी भी जानवर के काटने, खरोंचने या लार के संपर्क में आने पर घरेलू नुस्खे (जैसे मिर्च, चूना या मिट्टी लगाना) अपनाने में समय बर्बाद न करें। तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल जाकर विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में अपना पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करें। आपकी जागरूकता ही आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा है।”

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