बीएपीएस ने पूरी दुनिया में भारत की बदनामी की, इन पाखंडियों की मांग थी कि उनके दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को नजरों से दूर रखा जाए

नई दिल्ली। अखिल भारतीय दलित, ओबीसी एवं माइनारटीज परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. उदित राज ने कहा कि श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) ने भारत की घोर बदनामी की है और इस संस्था को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में पेरिस में नए मंदिर के उद्घाटन के सिलसिले में BAPS के संतों और सदस्यों ने एफिल टॉवर का निजी दौरा किया।
उदितराज ने कहा कि इन पाखंडियों की मांग थी कि उनके दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को नजरों से दूर रखा जाए और उनके स्थान पर पुरुषों को तैनात किया जाए। इसे लैंगिक भेदभाव बताते हुए कर्मचारियों ने 7 सितंबर को हड़ताल कर दी जिससे टॉवर बंद रहा। प्रबंधन ने माना कि ऐसी शर्तें स्वीकार नहीं की जानी चाहिए थीं और कर्मचारियों से माफी मांगी। जांच के आदेश के बाद टॉवर को पुनः खोल दिया गया।
उन्होंने कहा कि फरवरी 2020 में स्वामीनारायण भुज मंदिर से जुड़े स्वामी कृष्णस्वरूप दास ने अपने एक प्रवचन में कहा था कि मासिक धर्म (पीरियड्स) के दौरान यदि कोई महिला खाना बनाती है, तो वह अगले जन्म में ‘कुतिया’ के रूप में पैदा होगी और उसके हाथ का बना खाना खाने वाला पुरुष ‘बैल’ बनेगा।
जिस मां की कोख से ये पैदा हुए, उसी से नफरत करना और उसे गाली देना क्या दर्शाता है? ये किस प्रकार के धार्मिक लोग हैं? इन्हें विदेश जाने से रोका जाना चाहिए क्योंकि ऐसी मूर्खतापूर्ण सोच के कारण फ्रांस में भारत बदनाम हो रहा है। आश्चर्य है कि इस पंथ में तमाम महिलाएं पढ़ी-लिखी हैं, फिर भी वे यह अपमान सह रही हैं। क्या महिलाओं के नजर आने से इनका ब्रह्मचर्य भंग हो जाएगा या ये रास्ते से भटक जाएंगे? फिर ये कैसे संत हैं? जब इन्हें खुद पर नियंत्रण नहीं है तो संत बनने और ब्रह्मचर्य धारण करने का क्या औचित्य है? अफसोस है कि पढ़े-लिखे लोग भी पाखंड के चक्कर में मूर्खों और अनपढ़ों जैसा व्यवहार करने लगते हैं।