बसपा प्रमुख ने कहा – आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग ठीक नहीं, दलित सदियों से जातिवाद का शिकार रहे, आरक्षण विरोधियों को संरक्षण न दें

लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती दिल्ली के जंतर-मंतर पर आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है । उन्होंने रविवार को कहा- दलित सदियों से जातिवाद का शिकार रहे हैं। ऐसे में आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग ठीक नहीं है।दिल्ली में थाने के बाहर धरने पर बैठने वाले राहुल बगल में ही जंतर-मंतर पर चल रहे आरक्षण विरोधी प्रदर्शन को खत्म कराने नहीं गए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाने जाने की कोशिश तक नहीं की। इससे कांग्रेस की आरक्षण विरोधी मानसिकता साफ उजागर होती है।
बसपा प्रमुख ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की कि वे आरक्षण विरोधी तत्वों को किसी भी तरह की शरण या संरक्षण न दें। उन्होंने राजनीतिक दलों से कहा कि आरक्षण जैसे संवेदनशील और अहम मुद्दे पर सस्ती राजनीति बंद की जानी चाहिए।
मायावती ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को देश के खिलाफ और संविधान की भावना पर चोट करार दिया। उन्होंने साफ किया कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को सदियों से परेशान किया जा रहा है। इस जातिवादी उत्पीड़न से बचाने के लिए ही आरक्षण के रूप में संवैधानिक उपाय तैयार किया गया। ऐसे में आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की नई मांग कतई उचित नहीं है।
बसपा सुप्रीमो ने कहा- बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि ‘जातिवाद का त्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है।’ सरकारों की तरफ से हर साल गरीबी हटाने के लिए भारी-भरकम बजट खर्च किया जाता है। इसका लाभ न मिलना सरकारी व्यवस्था की विफलता और भ्रष्टाचार का नतीजा है, न कि आरक्षण का।