पूर्व मंत्री केके गौतम ने दलित वर्ग के सांसदों और विधायकों को पत्र भेजकर डॉ. अम्बेडकर के अस्थि कलश को बचाने की अपील

लखनऊ। डॉ. अम्बेडकर अस्थि कलश बचाओ संघर्ष मोर्चा के संयोजक केके गौतम ने सभी दलित सांसदों और विधायकों को लिखे पत्र में कहा है कि आप अवगत होंगे कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विधानसभा के सामने अंबेडकर महासभा प्रांगण में भारतीय संविधान निर्माता बोधिसत्व बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का अस्थि कलश उनकी पत्नी श्रीमती सविता अंबेडकर के द्वारा 14 अप्रैल 1991 को राजकीय सम्मान के साथ स्थापित किया गया था।
वर्तमान सरकार के एमएलसी डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल जी द्वारा बाबा साहब की 14 अप्रैल 2026 को अंबेडकर महासभा में आयोजित जयंती के कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री जी एवं चार कैबिनेट मंत्रियों की उपस्थिति में उपरोक्त बहुजन श्रद्धा एवं आस्था के प्रतीकों को विधानसभा के सामने से हटाकर ऐशबाग में स्थापित करने की घोषणा की गई।
इसी के साथ आस्था के उक्त प्रतीकों को ताले में बंद करके बुद्ध अंबेडकर अनुयायियों को दर्शन पूजन से मना कर दिया गया। उक्त घोषणा का वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही पूरे प्रदेश व देश में बहुजन समाज एवं बुद्ध अंबेडकर अनुयायी आंदोलित हो गए तथा तमाम बुद्धिजीवियों व अंबेडकर अनुयाययों ने “डॉक्टर अंबेडकर अस्थि कलश बचाओ मोर्चा” गठित करके तथा पूरे प्रदेश में मोर्चा के संयोजक नियुक्त करके आंदोलन प्रारंभ कर दिया।
फलस्वरूप पर्यटन एवं सांस्कृतिक मंत्री को आस्था के उक्त प्रतीकों को इसी स्थल पर बनाए रखने हेतु बयान देना पड़ा, परंतु वर्तमान भारतीय जनता पार्टी सरकार जन सामान्य में अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है इस कारण मोर्चा का संघर्ष जारी है। मोर्चा एवं सैड़कों बुद्ध अंबेडकर समितियां तथा सामाजिक संगठन उपरोक्त स्थल पर ही बाबासाहब के अस्थि कलश सहित उपरोक्त आस्था के प्रतीकों को यथावत बनाए रखने तथा इसी स्थल पर बाबा साहब का भव्य स्मारक बनावाए जाने की मांग सरकार से लगातार कर रहा है।

4 जुलाई 2026 को मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने पर्यटन एवं सांस्कृतिक मंत्री माननीय जयवीर सिंह जी से लगभग 1 घंटे वार्ता करके उन्हें इस आशय का ज्ञापन देकर भव्य स्मारक बनवाए जाने की मांग की है।
अंबेडकर महासभा प्रांगण में प्रत्येक बुधवार को उपरोक्त प्रतीको की पूजा वंदना हेतु सैकड़ों लोग उपस्थित होते हैं।
माननीय महोदय ज्ञातव्य है कि बाबा साहब के द्वारा संविधान के अनुच्छेद 330 व 332 में की गई आरक्षण की व्यवस्था के तहत आप आरक्षित सीट से सांसद/विधायक बने हैं।
इस कारण आपका नैतिक दायित्व है कि बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के उपरोक्त अस्थि कलश को विस्थापन से बचाने हेतु हर संभव प्रयास करें। यदि आप अस्थि कलश बचाने में अपनी सक्रिय भूमिका का निर्वहन करेंगे तो निश्चित रूप से बहुजन समाज आपका आभारी रहेगा।

इसी स्थल पर 21 अप्रैल 1993 को तत्कालीन उपराष्ट्रपति माननीय के आर नारायणन के द्वारा बोधि वृक्ष स्थापित किया गया तथा 14 सितंबर 2017 को तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद के द्वारा भव्य धम्म चक्र की स्थापना की गई एवं इसी स्थल पर बुद्ध विहार व बाबा साहब की विशाल प्रतिमा भी स्थापित है। देश विदेश के करोड़ों बुद्ध अंबेडकर अनुयायी, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री न्यायविद इस स्थल पर आकर बाबा साहब को वर्षों से पुष्पांजलि अर्पित करते हैं।
इसी स्थल से 14 अप्रैल 1990 को माननीय प्रधानमंत्री वीपी सिंह द्वारा ओबीसी को 27% आरक्षण दिए जाने की घोषणा की गई थी। इसी स्थल से माननीय वीपी सिंह द्वारा 1990 में हरिजन समाज कल्याण से हरिजन शब्द हटाने एवं समाज कल्याण विभाग बनाने की घोषणा की गई थी। इसी स्थल से 1993 में घोषणा करके तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय मुलायम सिंह यादव के द्वारा एससी एसटी का आरक्षण प्रतिशत बढ़ाकर क्रमशः 21% व दो प्रतिशत किया गया था।
इसी स्थल से 14 अप्रैल 2006 को मानव संसाधन विकास मंत्री माननीय अर्जुन सिंह द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी को 27% आरक्षण लागू करने की घोषणा की गई थी। इस प्रकार यह स्थल हमारी आस्था व श्रद्धा का प्रतीक तो है ही साथ ही साथ सामाजिक क्रांति एवं सामाजिक परिवर्तन के राष्ट्रीय महत्व का प्रतीक भी है।