बाबा साहब के अस्थि कलश को विस्थापित नहीं होने देंगे :  गौतम

Share

डॉ. अम्बेडकर का अस्थि कलश, बुद्ध प्रतिमा, बोधि वृक्ष हमारे लिए वंदनीय और हमारी आस्था का प्रतीक

लखनऊ ।   बहुजन समाज वृंदावन ग्रुप के द्वारा चलाए जा रहे बहुजन जागरूकता एकता अभियान के क्रम में 45 वीं बैठक 19 जुलाई 2026 को वृंदावन योजना के सेक्टर 11ए में शिव कुमार रावत के आवास पर संपन्न हुई। बैठक में भारी संख्या में बहुजन समाज के लोग एकत्रित हुए।

बैठक में उपस्थित वक्तागणों ने कहा की विधानसभा के सामने अंबेडकर महासभा प्रांगण में स्थित बाबा साहब का अस्थि कलश, बुद्ध प्रतिमा, बोधि वृक्ष की हम लोग पूजा अर्चना करते हैं तथा वे हमारे लिए वंदनीय हैं और हमारी आस्था के प्रतीक ही नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन और बहुजन क्रांति का प्रतीक एवं राष्ट्रीय महत्व की धरोहर भी हैं। 14 अप्रैल 2026 को इन्हें यहां से हटाकर ऐशबाग में विस्थापित करने की घोषणा डॉक्टर लाल जी प्रसाद निर्मल के द्वारा अनाधिकृत रूप से अपने निजी स्वार्थवश की गई है।

लालजी निर्मल का बयान संविधान के विरुद्ध है। बैठक में “अस्थि कलश बचाओ संघर्ष मोर्चा” के संयोजक मंडल के सदस्य एवं बहुजन समाज वृंदावन ग्रुप के संयोजक पूर्व एसडीएम रामकुमार गौतम के द्वारा कहा गया कि डॉ. लाल जी प्रसाद निर्मल वर्तमान में अंबेडकर महासभा के एकमात्र सदस्य हैं, जिन्हें इस प्रकार का वक्तव्य देने का कोई अधिकार नहीं है। लालजी प्रसाद निर्मल ने बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के मिलते जुलते नाम से अपने निजी नाम और पते पर ट्रस्ट बना रखा है।

 

इस ट्रस्ट में बाबा साहब की अस्थियों को स्थापित करने की बात कर रहे हैं। क्या बाबा साहब के  परिवार से इतर व्यक्तिगत ट्रस्ट में बाबा साहब डॉक्टर भीमराव की अस्थियां स्थापित की जा सकती है? क्या बाबा साहब की अस्थियां उनके परिवार के सदस्यों की बिना अनुमति के इस स्थल से हस्तांतरित की जा सकती है? गौतम ने ये प्रश्न डॉक्टर लालजी प्रसाद निर्मल व योगी सरकार से पूछे गए।

बैठक में आस्था के उपरोक्त प्रतीको को विधानसभा के सामने ही बनाए रखने तथा इसी स्थल पर भव्य स्मारक बनवाने एवं सौंदर्यीकरण कराने की मांग सरकार से की गई। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि बाबा साहब की अस्थियां विधानसभा के सामने स्थित अंबेडकर महासभा प्रांगण से किसी भी दशा में अन्य स्थान पर स्थानांतरित नहीं करने दी जाएगी इसके लिए किसी भी हद तक का आंदोलन क्यों न करना पड़े।

अभी हाल ही में स्मृति उपवन एलडीए कॉलोनी लखनऊ में पूर्व से बने हुए बौद्ध स्तूपों को एलडीए प्रशासन द्वारा हटा दिया गया। जिसका बहुजन समाज के द्वारा घोर विरोध किया गया तब पुनः आधे अधूरे स्तूप बनवाए गए।

इसी तरह तालकटोरा लखनऊ में लंगड़ा फाटक के पास अंबेडकर प्रतिमा पार्क की बाउंड्री तोड़ दी गई जिसका घोर विरोध किया गया। तब जाकर बाउंड्री पुनः ठीक कराई गई। इन घटनाओं का जिक्र करते हुए वक्त गणों के द्वारा कहा गया की वर्तमान में सत्ताधारी दल बाबा साहब की स्मृतियों को हटाकर उसके स्थान पर मनुवाद की स्मृतियां थोपना चाहती है। इसी कारण हमारे आस्था के प्रतीकों से बार-बार छेड़छाड़ की जा रही है। जिसे बहुजन समाज कभी बर्दाश्त नहीं करेगा और अवसर आने पर इसका पूरी दृढ़ता से जवाब देगा।

राम लगन सिंह यादव ने कहा कि मानुवादी विचारधारा के पोषक अधिकांश मंदिर सरकारी जमीन पर बने हुए हैं जिन्हें माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों के बावजूद भी ना तो हटाया जाता है ना उसे छेड़छाड़ की जाती है और लगातार सार्वजनिक सड़कों वह सरकारी पार्कों में नए-नए मंदिर खड़े होते चले जा रहे हैं, परंतु बहुजन आस्था के प्रतिकों को हटाने और मिटाने के लिए तरह-तरह के कानूनी हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।

पूर्व एसडीएम जीत लाल सैनी जी ने कहा कि सरकार की यह सोच कि अस्थि कलश केवल  जाति विशेष की आस्था का प्रतीक है, गलत है बाबा साहब का  कलश एवं बुद्ध प्रतिमा बौद्ध वृक्ष संपूर्ण भारत व विदेशों में बसे हुए बुद्ध अंबेडकर अनयायि व समस्त जातियों की श्रद्धा एवं आस्था का प्रतीक हैं।

पूर्व जज सत्यवीर सिंह यादव ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 49 के तहत आस्था व श्रद्धा तथा सांस्कृतिक महत्व के इस स्थल के संरक्षण का दायित्व राज्य सरकार का है। कार्यक्रम में वीर बहादुर बौद्ध , जीपी बौद्ध, आर एस दिवाकर, उदय राज, प्रेम प्रकाश गौतम, श्रीनाथ सिंह कुशवाहा, नंदलाल, बिहारी राम, राम सिंह, कृष्ण कुमार प्यारेलाल, डॉ उमाशंकर वर्मा, एडवोकेट बी एल गौतम, राम सजीवन, राजाराम गौतम, श्रीमती रचना कुरील, ब्रजकिशोर, अमरनाथ, पीसी केसरवानी, प्रदीप कुमार आदि ने अपने-अपने विचार रखें।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *