बाबा साहब के अस्थि कलश को भी हटाना चाहती है योगी सरकार : सलाहउद्दीन

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संविधान और आरक्षण का विरोध करने वाली भाजपा ने शुरू किया डॉ. अम्बेडकर का विरोध : सलाहउद्दीन सिद्दीकी

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं यूपी के पूर्व राज्यमंत्री सलाहउद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि समाजवादी पार्टी और हमारे नेता अखिलेश यादव जी शुरू से कह रहे हैं कि भाजपा संविधान और आरक्षण विरोधी होने के साथ ही बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की भी कट्टïर विरोधी है। भाजपा द्वारा संविधान और आरक्षण का विरोध तो समय-समय पर किया जाता है, इस बात को अब बहुजन समाज यानि पीडीए समाज के लोग भी अच्छी तरह से समझने लगे हैं।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता का कहना है कि भाजपा का जब आरक्षण और संविधान के विरोध से मन नहीं भरा तो अब सीधे-सीधे बाबा साहब की पवित्र अस्थि कलश को हटाने के लिए अभियान तेज कर दिया है।

बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के नाम से सचिवालय के सामने स्थापित डॉ. अम्बेडकर महासभा में बाबा साहब का पवित्र अस्थि कलश भी स्थापित है।

इसके साथ ही इस परिसर में जिस वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध ने तपस्या की थी और उन्हें बोधि की प्राप्ति हुई थी, उस बोधि वृक्ष की शाखा भी स्थापित है जो विशालकाय वृक्ष का रूप ले चुकी है।

यूपी में मौजूदा भाजपा सरकार इस परिसर को खत्म करने में जुटी है और महासभा परिसर को ऐशबाग स्थापित करने जा रही है।

सलाहउद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि भाजपा सरकार बाबा साहब के पवित्र अस्थि कलश को भी महासभा परिसर से हटाना चाह रही है। साथ ही बोधि वृक्ष को भी।  बाबा साहब के प्रति केवल दलित समाज का ही नहीं बल्कि पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक खासतौर पर मुस्लिम समाज का भी बहुत लगाव है, क्योंकि इन वर्गों को बाबा साहब द्वारा स्थापित भारतीय संविधान से ही सारे अधिकार प्राप्त हैं। ऐसे में अगर बाबा साहब के पवित्र अस्थि कलश को महासभा परिसर से हटाने की कोशिश हुई तो इसका लोकतांत्रिक तरीके से सपा कार्यकर्ता विरोध करेंगे।

भाजपा का अंबेडकर प्रेम केवल प्रतीकात्मक और राजनीतिक लाभ तक सीमित

उनका कहना है कि एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती तथा 6 दिसंबर को महापरिनिर्वाण दिवस पर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, वहीं दूसरी ओर उनके अस्थि कलश को मूल स्थान से हटाने का निर्णय सरकार के दोहरे चरित्र को उजागर करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बाबा साहेब के सम्मान की बातें की जाती हैं, लेकिन बहुजन समाज की आस्था से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार की संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती।

सलाहउद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि प्रश्न यह है कि यदि सरकार वास्तव में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के विचारों, संघर्षों और योगदान का सम्मान करती है, तो उनके अस्थि कलश को विधानसभा भवन के सामने से हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि भाजपा का अंबेडकर प्रेम केवल प्रतीकात्मक और राजनीतिक लाभ तक सीमित है।

बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल एक महान व्यक्तित्व नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता, मानवाधिकार, लोकतंत्र और संविधानिक मूल्यों के जीवंत प्रतीक हैं। उनके अस्थि कलश को इस प्रकार स्थानांतरित करना करोड़ों दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, वंचितों और संविधान समर्थक लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है।

पीडीए समाज अपने सम्मान, स्वाभिमान और बाबा साहेब के प्रति किसी भी प्रकार की उपेक्षा को कभी स्वीकार नहीं करेगा। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और योगी सरकार को इस अपमान का राजनीतिक एवं सामाजिक खामियाजा अवश्य भुगतना पड़ेगा।

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