बाबा साहेब के अस्थि कलश के स्थानांतरण का निर्णय बहुजन समाज की भावनाओं के विरुद्ध : भारती

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बाबा साहब अम्बेडकर वाहिनी सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मिठाई लाल भारती ने कहा योगी सरकार द्वारा बहुजन समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

लखनऊ।  समाजवादी बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मिठाई लाल भारती ने कहा कि जैसा कि सर्वविदित है, संविधान निर्माता, भारत रत्न एवं बहुजन समाज के महान प्रेरणास्रोत बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी का अस्थि कलश हजरतगंज स्थित विधानसभा भवन के सामने स्थापित है। यह स्थल करोड़ों अनुयायियों की आस्था, सम्मान, स्वाभिमान और भावनात्मक जुड़ाव का केंद्र रहा है। किन्तु योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा बाबा साहेब के अस्थि कलश को वहां से हटाकर ऐशबाग स्थित भवन में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है। यह कदम बहुजन समाज की भावनाओं को गहराई से आहत करने वाला है। विधानसभा भवन के सामने स्थित इस ऐतिहासिक एवं सम्मानित स्थल से अस्थि कलश को हटाना केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक चेतना के प्रतीकों की उपेक्षा का संकेत देता है।

बाबा साहेब के अस्थि कलश को मूल स्थान से हटाने का निर्णय सरकार के दोहरे चरित्र को उजागर करता है

मिठाई लाल भारती ने कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती तथा 6 दिसंबर को महापरिनिर्वाण दिवस पर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, वहीं दूसरी ओर उनके अस्थि कलश को मूल स्थान से हटाने का निर्णय सरकार के दोहरे चरित्र को उजागर करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बाबा साहेब के सम्मान की बातें की जाती हैं, लेकिन बहुजन समाज की आस्था से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार की संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती।

प्रश्न यह है कि यदि सरकार वास्तव में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के विचारों, संघर्षों और योगदान का सम्मान करती है, तो उनके अस्थि कलश को विधानसभा भवन के सामने से हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि भाजपा का अंबेडकर प्रेम केवल प्रतीकात्मक और राजनीतिक लाभ तक सीमित है।

बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल एक महान व्यक्तित्व नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता, मानवाधिकार, लोकतंत्र और संविधानिक मूल्यों के जीवंत प्रतीक हैं। उनके अस्थि कलश को इस प्रकार स्थानांतरित करना करोड़ों दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, वंचितों और संविधान समर्थक लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है।

उन्होंने कहा कि मैं  मिठाई लाल भारती, राष्ट्रीय अध्यक्ष समाजवादी बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी, इस निर्णय की कड़ी निंदा करता हूं। यह कदम सरकार की संवेदनहीनता तथा संविधानिक मूल्यों के प्रति उसकी उदासीन मानसिकता को उजागर करता है।

समाजवादी बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी सरकार से मांग करती है कि बहुजन समाज की भावनाओं का सम्मान किया जाए तथा इस विषय पर स्पष्ट एवं संतोषजनक जवाब दिया जाए। यदि सरकार ने इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से प्रदेशव्यापी आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगा।

हम स्पष्ट कहना चाहते हैं कि बहुजन समाज अपने सम्मान, स्वाभिमान और बाबा साहेब के प्रति किसी भी प्रकार की उपेक्षा को कभी स्वीकार नहीं करेगा। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और योगी सरकार को इस अपमान का राजनीतिक एवं सामाजिक खामियाजा अवश्य भुगतना पड़ेगा।

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