आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद पुराने पेंशनरों का किसी भी तरह का कोई भत्ता या अन्य देय आदि नहीं बढ़ेगा
कमल जयंत
उत्तर प्रदेश सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बीएल कुशवाहा का कहना है कि केन्द्र सरकार पुराने पेंशनरों को बोझ समझने लगी है। यही वजह है कि केन्द्र सरकार ने जो आठवां वेतन आयोग गठित किया है, उसमें जो विचारणीय विषय टम्र्स आफ रेफरेंस (टीओआर) है, उससे पुराने पेंशनर को बाहर कर दिया है।
यानि कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद पुराने पेंशनरों का किसी भी तरह का कोई भत्ता या अन्य देय आदि नहीं बढ़ेगा, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारी जो सरकार की पेंशन का लाभ पा रहे हैं, उनके पेंशन में किसी भी तरह की कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।
1982 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने निर्णय दिया कि पेंशन कोई दया या भीख नहीं है बल्कि कर्मचारियों की लंबी सेवाओं के बदले रिटायरमेंट के बाद एक लंबित वेतन है, जो प्रत्येक कर्मचारी का अधिकारी है।

आठवें वेतन आयोग की शर्तों में पुराने पेंशनरों को अनकंट्रीबूटर और अनफंडेड यानि अनुपयोगी कहा गया है
बीएल कुशवाहा का कहना है जबकि सातवें वेतन आयोग ने पुराने पेंशनरों के भत्तों, सुविधाओं का ख्याल रखा और उसे पुनरीक्षण में शामिल किया।
उनका कहना है कि आठवें वेतन आयोग की शर्तों में पुराने पेंशनरों को अनकंट्रीबूटर और अनफंडेड यानि अनुपयोगी कहा गया है। इससे ऐसा लगता है कि केन्द्र सरकार पुराने पेंशनरों को दया का पात्र समझ रही है और धीरे-धीरे करके इनसे मुक्ति का मार्ग तलाश रही है।
कुशवाहा का कहना है कि 1982 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने निर्णय दिया कि पेंशन कोई दया या भीख नहीं है बल्कि कर्मचारियों की लंबी सेवाओं के बदले रिटायरमेंट के बाद एक लंबित वेतन है, जो प्रत्येक कर्मचारी का अधिकारी है।

बिना वेतन आयोग की सिफारिश के हमारे देश व प्रदेश के माननीय लोग एक तरफ तो पुरानी मल्टीपल पेंशन ले रहे हैं अर्थात यदि वह लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा व विधान परिषद आदि जितने सदनों के सदस्य रहे, उन सभी सदनों की पेंशन ले रहे हैं
सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के यूपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बीएल कुशवाहा का कहना है बिना वेतन आयोग की सिफारिश के हमारे देश व प्रदेश के माननीय लोग एक तरफ तो पुरानी मल्टीपल पेंशन ले रहे हैं अर्थात यदि वह लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा व विधान परिषद आदि जितने सदनों के सदस्य रहे, उन सभी सदनों की पेंशन ले रहे हैं।
उनका कहना है कि यह दुर्भाग्य है कि हम सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अनफंडेड व अनकंट्रीबूटर कहा जा रहा है। इसको लेकर पूरे प्रदेश व देश के सेवानिवृत्त पेंशनर कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है। उनका कहना है कि सरकार के पेंशनर विरोधी रवैये के खिलाफ सेवानिवृत्त पेंशनभोगी कर्मचारियों ने आंदोलन शुरू कर दिया है।
यूपी में पिछले साल चार बार और इस वर्ष 21 अप्रैल को आल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट कर्मचारी फेडरेशन के आह्वान पर देश भर में व यूपी के सभी जिलों में धरना-प्रदर्शन करके सरकार के सामने अपना विरोध दर्ज कराया है।
