संविधान नहीं होता तो वंचित समाज आज भी गुलामी की जिंदगी जी रहा होता
आजमगढ़। सामाजिक संस्था बहुजन भारत के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति, पिछड़े, एवं अल्पसंख्यक, गरीब शोषित वंचित मजलूमों के समग्र विकास में भारतीय संविधान का क्या महत्व है, यह हमें समझना होगा। उन्होंने कहा कि अगर संविधान नहीं होता तो वंचित समाज आज भी गुलामी की जिंदगी जी रहा होता। भारतीय संविधान ने बहुजनों को रास्ता दिखाया कि हमें किस व्यवस्था के अनुसार रहना हैं।

आजमगढ़ जिले के विधानसभा क्षेत्र मेंहनगर के ग्राम पंचायत भोजपुर विकासखंड पल्हना में सामाजिक संस्था बहुजन भारत द्वारा आयोजित प्रबुद्ध जन सम्मेलन एवं विचार गोष्ठी में उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने भारतीय संविधान में सभी को एक वोट का अधिकार दिया और बहुजन समाज के लोगों ने इसी वोट के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में एक बार नहीं बल्कि पांच बार सरकार बनी।

उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने कहा था कि सत्ता वह मास्टर चाभी है, जिससे बहुजनों के विकास के सारे दरवाजे खुलते हैं। बहुजन नायक कांशीराम जी ने उनके इसी विचार को आत्मसात करके बहुजन समाज को एकजुट किया और इनकी एकता के बदौलत यूपी की सत्ता पर काबिज हुए।
उन्होंने कहा कि जिसकी सत्ता होती है उस समाज के साथ किसी भी तरह का कोई भेदभाव, अपमान, ज्यादती नहीं होती और उस समाज की बहन-बेटियों के सम्मान के साथ कोई भी खिलवाड़ करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। लिहाजा सम्मान से जीने और अपने अधिकारों को पाने के लिए जरूरी है कि बहुजन समाज के लोग एकजुट होकर अपनी विचारधारा की सरकार नायें।उन्होंने कहा कि कांशीराम साहब ने कहा था कि जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी, अगर आप सत्ता में भागीदारी नहीं लेंगे तो आप अपनी हिस्सेदारी नहीं ले सकते हैं। सत्ता अगर आपके हाथ में है तो आप सब कुछ कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उदाहरण के तौर पर उन्होंने कहा कि आज सत्ता विपरीत होने के नाते अनुसूचित जाति के चीफ जस्टिस के कोर्ट में उनके ऊपर जूता फेंका गया , अगर बहुजनों की सत्ता होती इस प्रकार की समस्या नहीं आती।
इसलिए बाबा साहब और कांशीराम साहब की जो सोच थी कि अगर संविधान है तो सब कुछ है संविधान के साथ ही किसी सत्ता या किसी अधिकार की लड़ाई लड़ सकते हैं। कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि सरकार ने शिक्षा को बहुत ज्यादा महंगा कर दिया है। ऐसे में क्या आप अपने बच्चों को मेडिकल की पढ़ाई पढ़ा सकते हैं, नही क्योंकि फीस इतनी महंगी हो चुकी है कि करोड़ों रुपये एक गरीब आदमी फीस नहीं दे पाएगा।
कांशीराम जी एक जाति या धर्म विशेष के विकास के कभी भी पक्षधर नहीं रहे
कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि ऐसे में क्या आप अपने बच्चों को मेडिकल की पढ़ाई पढ़ा सकते हैं, नही क्योंकि फीस इतनी महंगी हो चुकी है कि एक गरीब आदमी तो छोड़ो मध्यम वर्ग के लोग भी इसे नहीं भर पाएंगे। आज के समय में जितना जल्दी हम चेत जायेगे उतना ही जल्दी हमारा विकास होगा नहीं तो आप अपने बच्चों को पढ़ा तक नहीं पाएंगे। हमें सत्ता में हिस्सेदारी के लिए अपना एक ऐसा नेता चुनना होगा, जिससे हम अपनी सब समस्या दुख सुख अपनी तकलीफ को कह सकें। कांशीराम साहब ने कभी नहीं कहा था कि एक जाति विशेष या धर्म का विकास हो उनकी सोच थी जिस समाज की जितनी जिसकी संख्या है उसका उतना अधिकार होना चाहिए। उन्होंने बहुजनों के लिए ही कहा था इसलिए उन दोनों महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम सत्ता की मास्टर चाबी को प्राप्त कर लेंगे।
गरीबी उन्मूलन के लिए नहीं है संविधान में आरक्षण की व्यवस्था : अनिरुद्ध सिंह
सेमिनार में विशिष्ट अतिथि एवं समाजसेवी अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि सामाजिक क्रांति ही राजनीतिक क्रांति की जननी होती है बाबा साहब द्वारा संविधान में दिया गया आरक्षण किसी गरीबी उन्मूलन योजना के रूप में नहीं बल्कि शिक्षा, सत्ता ,संपत्ति, और सम्मान से वंचित वर्गों को शासन प्रशासन और अन्य सरकारी क्षेत्र में उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के उद्देश्य से है। मैं अपने युवाओं से कहना चाहता हूं कि वह आगे आएं और हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलें आपके जोश और मेहनत से हम मिलकर बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं। साथ ही मैं अपने बुजुर्गों और वरिष्ठ जनों से निवेदन करता हूं कि हमें अपना आशीर्वाद और मार्गदर्शन दें। आपके अनुभव आशीर्वाद से ही हम सही रास्ते पर आगे बढ़ पाएंगे।
गुलामी में जकड़े समाज को आजाद कराने के लिए अभी और संघर्ष करने की जरूरत
उन्होंने कहा कि बाबा साहब का यह विचार आज भी बहुजन समाज के लिए बहुत प्रेरणादायक है। बाबा साहब ने कहा था इंसान जीता है, पैसा कमाता है, खाना खाता है, और अंत में मर जाता है। वह जीता है इसलिए,ताकि कमा सके, कमाता है इसलिए ताकि खा सके, और खाता है, इसलिए ताकि जिंदा रह सके, लेकिन फिर भी एक दिन मर जाता है। अगर सिर्फ मरने केडर से ही जी रहे हैं तो अभी मर जाओ मेहनत बच जाएगी। लेकिन सच्चाई यह है कि मरना तो सभी को एक दिन है इसलिए इंसान को सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि समाज के लिए जीना चाहिए। अपनी जिंदगी का एक उद्देश्य बनाना चाहिए जो समाज गुलामी और अन्य में जकड़ा हुआ है उसे आजाद करना चाहिए अपने परिवार का पालन पोषण तो जानवर भी कर सकते हैं, लेकिन असली इंसान वही है जो समाज के बारे में सोचता है और उसके लिए काम करता है।
आयोजन के संयोजक शिक्षा विभाग प्रयागराज के प्रवक्ता दिनेश कुमार और आयोजन की अध्यक्षता पन्नालाल द्वारा किया गया। इस मौके पर तुलसीराम (पूर्व राज्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड) केडी राम पूर्व मुख्य विकास अधिकारी, राजबली पूर्व आडिटर, त्रिवेणी राम पूर्व प्रधानाचार्य केंद्रीय विद्यालय, जयप्रकाश पूर्व ब्लाक प्रमुख डोभी जौनपुर, तथा अन्य लोगों ने बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर और कांशीराम साहब जी के चित्र पर दिप प्रज्वलन, पुष्प अर्पित एव माल्यार्पण कर स्वागत किया। डॉ. रागनी गौतम असिस्टेंट प्रोफ़ेसर , सुरेंद्र राम प्रवक्ता काशी विद्यापीठ, इंद्रजीत राम प्रवक्ता चंदेश्वर महाविद्यालय,देवचंद राम पूर्व उपसचिव (एलडीए) ने भी भारतीय संविधान व समाज के सुधार पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन लालसा राम पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने किया। कार्यक्रम में चंद्रजीत राम, राम आश्रय राम (प्रधान , हरिप्रकाश सेवानिवृत्त प्रबन्धक ग्रामीण बैंक, मिथिलेश गौतम, शैलेश कुमार अग्रसेन महिला पीजी कॉलेज, अरुण राजभर क्षेत्र पंचायत सदस्य भोजपुर, पदम राजभर (प्रधान) भोजपुर, अनिल सागर प्रधान परसौली, मनीराम ग्राम प्रधान चिलबिला, कामरेड हामिद अली एडवोकेट लालगंज, सुरेश राम अध्यक्ष बार एसोसिएशन केराकत, रमा राजभर पुर्व जिला पंचायत सदस्य तरवा, राम प्रसाद राम जिला पंचायत सदस्य गोपालपुर, राजू राजवाड़ा जिला पंचायत सदस्य ,महेश कुमार भोजपुर,सुरेश कुमार भोजपुर, अखिलेश कुमार , त्रिभुवाराम ,डॉ तिलकधारी, एडवोकेट दिलीप कुमार, एडवोकेट श्याम कन्हाई राम, इंजीनियर रामबेलास , इंजीनियर हेमंत कुमार , जितेंद्र कुमार आदि लोग उपस्थित रहे।
