भारत में एनजीओ को मिलने वाले विदेशी चंदे को रोकने को लाया गया विदेशी अंशदान बिल

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यह विधेयक भारत में ईसाई संस्थाओं व उनकी सम्पत्तियों पर आरएसएस द्वारा कब्जा करने के उद्देश्य से लाया गया : उदितराज

लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज, आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. उदितराज ने कहा कि विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का मुख्य उद्देश्य भारत में एनजीओ और संस्थाओं को मिलने वाले विदेशी चंदे को रोकना है। यह 2010 के कानून में संशोधन कर सरकारी निगरानी को और अधिक सख्त बनाता है। मुख्य रूप से, यह विधेयक भारत में ईसाई संस्थाओं जैसे स्कूल, अस्पताल, हॉस्टल, वृद्धाश्रम, नशामुक्ति केंद्र और अन्य संपत्तियों पर आरएसएस द्वारा कब्जा करने के उद्देश्य से लाया गया है। मदरसे भी निशाने पर हैं, और वह समय दूर नहीं है जब गुरुद्वारों के माध्यम से आने वाली सहायता पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।


उन्होंने कहा कि विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता लाने के लिए एक ‘नामित प्राधिकरण’ बनाने का प्रावधान है। जिस तरह चुनाव आयोग बीजेपी की इकाई की तरह काम कर रहा है, उसी तरह यह भी करेगा यदि यह संशोधन लागू हो जाता है। यदि किसी आतंकी और एफसीआरए लाइसेंस रद्द या सरेंडर होता है, तो उससे निर्मित संपत्तियों (स्कूल, अस्पताल, हॉस्टल आदि) पर सरकार का नियंत्रण स्थापित हो जाएगा। जिस तरह से अडानी की जहाँ नज़र पड़ती है, सरकार उसे दे देती है, उसी तरह इन संपत्तियों को भी बीजेपी और आरएसएस से जुड़े लोग हड़प लेंगे। अब ट्रस्टी, निदेशक और प्रबंधन से जुड़े लोग व्यक्तिगत रूप से अपराधों के लिए जिम्मेदार होंगे। आरोप लगाना बहुत आसान है, और इस तरह जेल का डर दिखाकर उनकी संपत्तियाँ हड़प ली जाएँगी। कानून के उल्लंघन के लिए एक वर्ष की सजा और जुर्माने का प्रस्ताव है।

उदितराज ने कहा कि अनुपालन संबंधी कमियों को दूर करने के लिए संगठनों को एसबीआई नई दिल्ली की मुख्य शाखा में खाता खोलना अनिवार्य किया गया है। इससे पूरे देश के लोगों को दिल्ली आना होगा और वे अपनी सुविधा के अनुसार बैंक या स्थान नहीं चुन सकेंगे। इसका जोरदार विरोध होना चाहिए। अमेरिका के डेट्रॉइट शहर में एक मंदिर का उद्घाटन मैंने स्वयं किया था। मंदिर निर्माणकर्ता से बातचीत में उन्होंने बताया कि भारत के विभिन्न स्थानों से धार्मिक मान्यता के आधार पर लगभग 100 करोड़ रुपये का पत्थर, चंदन की लकड़ी आदि आयात करके मंदिर का निर्माण किया गया। अमेरिकी सरकार धार्मिक मामलों में काफी नरम है। वहाँ हजारों बंद चर्चों को खरीदकर मंदिरों में परिवर्तित किया गया है, और इसमें काफी मात्रा में काले धन का भी उपयोग होता है।

कौन-सा ऐसा देश है जो बाहरी मुद्रा के आगमन पर प्रतिबंध लगाता है?

उनका कहना है कि केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोप, न्यूज़ीलैंड, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य देशों में भी ऐसा होता है। जब तक वहाँ इन गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सरकार रुकने वाली नहीं है। क्रस्स् और बीजेपी को क्या परेशानी है यदि बाहर से पैसा आ रहा है और उससे गरीबों को हॉस्टल, स्किल ट्रेनिंग सेंटर, भोजन, कपड़ा, शिक्षा, वृद्धाश्रम तथा दलित और आदिवासी बच्चों को सहायता मिल रही है? कौन-सा ऐसा देश है जो बाहरी मुद्रा के आगमन पर प्रतिबंध लगाता है? व्यापार के नाम पर अन्य फंड का स्वागत क्यों किया जाता है, जबकि उनमें से बहुत सारा धन टैक्स चोरी से बचने के लिए हवाला के माध्यम से भेजा जाता है?
उन्होंने कहा कि मैं ट्रस्ट, सोसाइटी और स्कूल-अस्पतालों का आयकर अधिकारी रहा हूँ। बैलेंस शीट और प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट में सैकड़ों विवरण होते हैं, और यदि कोई अधिकारी कमी निकालना चाहे तो कोई भी बच नहीं सकता। क्रस्स् और बीजेपी का मुख्य उद्देश्य यह है कि दलितों और पिछड़ों का जो थोड़ा-बहुत विकास हो रहा है, उस पर रोक लगाई जाए। लोग स्वेच्छा से ईसाई धर्म अपनाते हैं, क्योंकि वहाँ उन्हें सम्मान और शिक्षा जैसे लाभ मिलते हैं। ईसाइयों से डर क्यों? मंदिरों और मठों में अरबों रुपये हैं वे भी हॉस्टल, अस्पताल, स्कूल और संस्थान क्यों नहीं बनाते? उनके पास जितना धन है, उसके सामने ईसाई और मुस्लिम समुदायों के संसाधन बहुत कम हैं।

अडानी का 32 हजार करोड़ मॉरीशस में पड़ा है उसे वापस लाने के लिए कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?

कांग्रेस नेता ने कहा कि दुबई रेत और समुद्र पर बना है, फिर भी वहाँ पूरी दुनिया की पूंजी पहुँची है, और आज भारत से लाखों लोग वहाँ व्यापार कर रहे हैं। यदि ईमानदारी से जांच हो, तो कई नेताओं, अधिकारियों और व्यापारियों का पैसा वहाँ लगा हुआ मिलेगा। लाखों धनाढ्य लोग देश का धन लेकर विदेश चले गए हैं, और यदि एफसीआरए के माध्यम से कुछ धन भारत में आ रहा है, तो उसमें क्या समस्या है? मेरा मानना है कि इसे पूरी तरह खोल देना चाहिए, ताकि और अधिक पूंजी आए और देश का विकास हो। अडानी का लगभग 32 हजार करोड़ रुपये मॉरीशस में पड़ा है उसे वापस लाने के लिए कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? मैं यह भी जानता हूँ कि कई लोग और संस्थाएँ अमेरिका और अन्य देशों में एक-एक पैसा जुटाकर भारत में चैरिटेबल कार्यों के लिए भेजते हैं, और यह संशोधन उस पर भी रोक लगाने की कोशिश करता है।

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