नक्सलवाद का जन्म मूलत: सामंतवाद के कारण हुआ था
लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज, आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने कहा कि क्या वास्तव में बीजेपी नक्सलवाद से निकालकर आदिवासियों का भला चाहती ? बिल्कुल नहीं! उन्होंने कहा कि नक्सलवाद का जन्म मूलत: सामंतवाद के कारण हुआ था। मुख्य रूप से आदिवासी समाज इससे आकर्षित हुआ क्योंकि उन्हें जल, जंगल और जमीन से बेदखल किया जा रहा था। ठेकेदारों और जंगल के अधिकारियों ने न केवल उनके आर्थिक स्रोतों पर हमला किया, बल्कि उनकी बहन-बेटियों की इज्जत पर भी आघात किया। कैडर का अधिकांश हिस्सा आदिवासी समाज से आता है, जबकि नेतृत्व सवर्ण समाज से होता है। जहां-जहां नक्सलवाद का प्रभाव बढ़ा, वहां विकास पर प्रतिकूल असर पड़ा। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के सामने हथियारबंद रास्ते से कुछ हासिल करना संभव नहीं है, इसलिए बचे-खुचे नक्सलियों को भी लोकतांत्रिक रास्ते पर लौट आना चाहिए।
आदिवासियों को माक्र्सवाद और माओवाद को छोडक़र फुले, साहू और अंबेडकर के विचार अपनाने चाहिए
उदितराज ने कहा कि माक्र्सवाद और माओवाद को छोडक़र फुले, साहू और अंबेडकर के विचार अपनाने चाहिए। आरएसएस का लक्ष्य इन्हें हिंदू बनाना है, ताकि वे अछूत और नीच बन जाएं। आदिवासी हिंदू समाज का हिस्सा नहीं रहे हैं और वे प्रकृति के पूजक हैं। उनके देवी-देवता अलग हैं और ऊंच-नीच की कोई परंपरा नहीं है। महिलाओं को अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता प्राप्त है। उन्हें पूरी तरह से संवैधानिक रास्ते पर लौट आना चाहिए। सबसे बड़ा खतरा यह है कि कहीं उन्हें पाखंड में न फँसा दिया जाए। ये लोग सीधे-सादे हैं और वर्ण व्यवस्था के दांव-पेंच को नहीं समझते। अमित शाह जी की चिंता इनका उद्धार नहीं है, बल्कि उनकी विचारधारा से नफरत है। यदि वे अपनी विचारधारा छोड़ते हैं, तो वे वर्ण व्यवस्था के करीब आ जाएँगे और फिर हिंदू-मुस्लिम के द्वंद्व में फंस सकते हैं। बीजेपी को इनकी चिंता नहीं है, बल्कि वह अपना फायदा देख रही है।