लखनऊ यूनिवर्सिटी में छात्राओं ने डॉ. अम्बेडकर की डीपी लगाने का किया विरोध

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सवर्ण वर्ग की छात्राओं में बाबा साहब के प्रति बढ़ रही नफरत

लखनऊ। केन्द्र से लेकर राज्य सरकार ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की तस्वीर सरकारी दफ्तरों लगाना अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही सरकार बाबा साहब का नाम लेते नहीं थकती, उनके आयोजनों को धूमधाम से मनाती है। लेकिन किसी भी सरकारी या गैर सरकारी संस्थानों में यदि कहीं कोई बाबा साहब का अपमान करता है तो सरकार और शासन में बैठे अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं। ऐसा ही एक मामला लखनऊ यूनिवर्सिटी का सामने आया है। यूनिवर्सिटी में डॉ. भीमराव अम्बेडकर गल्र्स हॉस्टल की एडमिन और एलएलबी अंतिम सेमेस्टर की छात्रा नेहा कामले ने कुलपति को भेजे शिकायती पत्र में लिखा है कि वार्डन डॉ. रिचा सक्सेना के निर्देशानुसार मैंने हॉस्टल का एक नया व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। चूंकि हॉस्टल का नाम बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर है, अत: मैंने ग्रुप आइकन पर उनकी तस्वीर लगाई थी।

 दलित छात्रा ने इस मामले में की शिकायत तो उसके कमरे में की तोड़फोड़

कुलपति को लिखे पत्र में कामले ने लिखा है कि छात्रावास की कुछ छात्राओं (स्मृति, शिवानी और आयुषी) द्वारा बाबा साहब की तस्वीर के प्रति घृणा प्रकट करते हुए उसे बार-बार हटाया गया। जब मैंने एक कानून की छात्रा के नाते इसका संवैधानिक विरोध किया, तो इन छात्राओं द्वारा मेरे विरुद्ध अत्यंत भद्दी और जातिसूचक गालियों का प्रयोग किया गया। 26 मार्च 2026 को रात लगभग 11:00 बजे, उक्त छात्राओं ने सामूहिक रूप से मेरे कमरे में घुसकर मेरे साथ मारपीट की और मुझे शारीरिक व मानसिक चोट पहुँचाई। रात के समय छात्रावास जैसे सुरक्षित स्थान पर कमरे में घुसकर हमला करना मेरी सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। नेहा ने आगे लिखा है कि इस संबंध में मैंने आवश्यक विश्वविद्यालय प्रबंधन में शिकायत की है, परंतु अभी तक दोषियों के विरुद्ध कोई कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे अपराधी छात्राओं के हौसले बुलंद हैं और मैं स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रही हूँ।

मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जाँच हेतु एक समिति गठित की जाए

इस मामले में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रदेश प्रवक्ता देव प्रताप सिंह ने कहा है कि दोषी छात्राओं के विरुद्ध विश्वविद्यालय के नियमों के तहत तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। छात्रावास में दलित छात्रा नेहा कामले की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं ताकि मेरी अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा और पढ़ाई प्रभावित न हो। उन्होंने यह भी कहा कि एक कानून की छात्रा होते हुए भी यदि वह विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षित नहीं है, तो यह अत्यंत चिंताजनक है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके नेतृत्व में नेहा कामले को शीघ्र न्याय मिलेगा।

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