दलितों के वोट के लिए कांशीराम जी को याद कर रहे सपा प्रमुख
लखनऊ। डॉ. अम्बेडकर महासभा ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव को यूपी में विधानसभा का चुनाव करीब आते ही बहुजन नायक कांशीराम जी की याद आने लगी है। ये वही अखिलेश यादव हैं, जिन्होंने यूपी में मुख्यमंत्री रहते हुए कांशीराम जी के नाम से बनाये गये जिले, मेडिकल कालेज और अरबी-फारसी विश्वविद्यालय का नाम बदल दिया। इसी मुस्लिम प्रेम की वजह से अखिलेश यादव ने अपनी सरकार में कांशीराम जी के नाम से बने अरबी-फारसी विश्वविद्यालय का नाम बदलकर मोइनुद्दीन चिश्ती विश्वविद्यालय कर दिया।

इतना ही नहीं सहारनपुर मेडिकल कालेज का नाम भी कांशीराम मेडिकल कालेज था इसे भी बदलकर उन्होंने महमूदुल हसन नदवी के नाम से कर दिया। इतना ही नहीं मान्यवर कांशीराम नगर का नाम बदलकर कासगंज कर दिया। चुनाव करीब है, इसलिए अब अखिलेश को दलितों के वोट के लिए कांशीराम जी की याद आने लगी है।
उन्होंने कहा कि अब दलितों को रिझाने के लिए वे कांशीराम जी की जयंती को पीडीए दिवस के रूप में मनाने जा रहे हैं। जबतक सत्ता में रहे तबतक इनके इस कथित पीडीए से डी यानि दलित हमेशा नदारद रहा। केवल इतना ही होता तब भी दलित शांत रहते, लेकिन जिस तरह से बदले की भावना से अखिलेश ने दलित अधिकारियों का डिमोशन किया, जिसकी वजह से एसडीएम स्तर के अधिकारियों को तहसीलदार बनना पड़ा। सबसे ज्यादा दलितों का नुकसान तो सिर्फ और सिर्फ अखिलेश यादव ने ही किया। चाहे दलितों के प्रोमोशन में आरक्षण का मामला हो, इसे अखिलेश ने स्वत: संज्ञान लेकर खत्म किया। सत्ता में रहने पर सिर्फ मुस्लिम प्रेम जागता है।