मुर्मू जी राममंदिर के उद्घाटन में मोदी जी ने आपको नहीं बुलाया तब क्या आपका अपमान नहीं हुआ
लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज, आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने राष्ट्रपति मुर्मू से कहा कि आप बीजेपी में शामिल क्यों नहीं हो जातीं? राष्ट्रपति महोदया मुर्मू जी को नई संसद भवन के शिलान्यास पर जब मोदी जी ने नहीं बुलाया, तब क्या उनका अपमान नहीं हुआ? राम मंदिर के उद्घाटन पर भी उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। तब आपको प्रोटोकॉल का ख्याल क्यों नहीं आया?
राष्ट्रपति जी आप बीजेपी में शामिल क्यों नहीं हो जातीं?
डॉ. उदितराज ने कहा कि संसद भवन में अन्य पत्रकारों और फिल्मी दुनिया के लोगों को आमंत्रित किया गया, तब राष्ट्रपति महोदया क्यों चुप रहीं? खुद मुर्मू जी ने भी कभी अपने सम्मान की बात नहीं उठाई। जब मोदी सरकार ने आदिवासियों का आरक्षण छीन लिया, तब भी मुर्मू जी ने कुछ नहीं कहा। छत्तीसगढ़ और ओडिशा में आदिवासियों पर अत्याचार हुए, तब भी वे नहीं बोलीं। जबकि बसपा प्रमुख मायावती जी को बस बहाना चाहिए बीजेपी के साथ खड़ा होने का। लुका-छिपी बंद करें और बीजेपी में शामिल हो जाएं। कांग्रेस को सत्ता में आने दें ताकि एससी/एसटी/ओबीसी का फिर से भला होना शुरू हो सके।
राष्ट्रपति पद का राजनीतिकरण करना ठीक नहीं : मायावती

वहीं दूसरी तरफ बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि भारतीय संविधान के आदर्श व मान-मर्यादा के मुताबिक सभी को माननीय राष्ट्रपति पद का सम्मान करना एवं इनके प्रोटोकाल का भी ध्यान रखना ज़रूरी है तथा इस पद का किसी भी रूप में राजनीतिकरण करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश की राष्ट्रपति एक महिला होने के साथ-साथ वे आदिवासी समाज से भी हैं। लेकिन अभी हाल ही में पश्चिम बंगाल में उनके दौरे के लेकर जो कुछ भी हुआ वह नहीं होना चाहिये था। यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण। इसी प्रकार, पिछले कुछ समय से संसद में भी ख़ासकर लोकसभा अध्यक्ष के पद का भी जो राजनीतिकरण कर दिया गया है, यह भी उचित नहीं है। सभी को संवैधानिक पदों का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आदर-सम्मान व उनकी गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिये तो यह बेहतर होगा। इसी क्रम में संसद का कल से शुरू हो रहा सत्र देश व जनहित में पूरी तरह से सही से चले, यही लोगों की अपेक्षा व समय की भी माँग।
