पीसीएस-2025 प्री परीक्षा परिणाम को हाईकोर्ट में चुनौती

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हाईकोर्ट ने राज्य लोकसेवा आयोग से मांगा जवाब

लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा (पीसीएस) प्रारम्भिक परीक्षा-2025 और सहायक वन संरक्षक प्रारम्भिक परीक्षा के परिणामों को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से जवाब तलब किया है। न्यायालय ने इस मामले में विपक्षी दलों को एक सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष माथुर ने अभिषेक कुमार यादव व बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य पर सुनवाई करते हुए पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी, 2026 को नियत की गई है।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल ने तर्क दिया कि कि कई ओबीसी अभ्यर्थी पीसीएस प्री परीक्षा में शामिल हुए थे, जिन्हें सामान्य श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त हुए हैं। अधिवक्ता की दलील है कि कि आयोग ने आरक्षण अधिनियम 1994, इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार केस के सिद्धांतों और राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा रजत यादव केस (सिविल अपील 14112/2024) में दिए गए निर्देशों का उल्लंघन किया है।

माइग्रेशन रूल्स के उल्लंघन का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि यूपी लोक सेवा आयोग द्वारा माइग्रेशन रूल्स का पालन नहीं किया जा रहा है। याचियों का कहना है कि कि सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों से अधिक अंक होने के बावजूद उन्हें नियमों का लाभ नहीं दिया गया और उन्हें मुख्य परीक्षा से वंचित कर दिया गया है। कोर्ट ने प्रारम्भिक सुनवाई के बाद प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।

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