शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बयान पर भड़के अम्बेडकरवादी

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आरक्षण से नौकरियों में आये लोग पूजा, कर्मकांड, दान आदि करते हैं तो तुरंत छोड़ दें या आरक्षण का त्याग करें वर्ना ये बेइमानी होगी : उदितराज

जब मनुवादी चिल्लाकर कह रहे हैं अम्बेडकरवादी दुश्मन हैं तो फिर वहां गुलामी क्यों कर रहें हैं

लखनऊ। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा अम्बेडकरवाद के खिलाफ दिये गये बयान पर अम्बेडकरवादी विचारधारा के नेताओं ने शंकराचार्य पर हमला बोला है। कांग्रेस नेता व पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि आखिर डॉ. अम्बेडकर ने इन लोगों का क्या बिगाड़ा है। उन्होंने दबे, कुचले और महिलाओं को सम्मान से जीने के लिए कहा फिर भी उनसे इतनी न$फरत क्यों! मालूम हो कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा है कि इस्लाम नहीं, बल्कि अंबेडकरवादी हिंदू धर्म के लिए ख़तरा हैं। स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा हिंदू संस्कृति को बचाना है तो डॉ. अंबेडकर को मिटाना होगा। अंबेडकर के सोच और अंबेडकरी बुद्धिज्म को मिटाना है।

शंकराचार्य ने कहा था, इस्लाम नहीं, बल्कि अंबेडकरवादी हिंदू धर्म के लिए खतरा

इससे पहले आजाद समाज के प्रमुख चन्द्रशेखर आजाद ने भी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के इस बयान पर गहरी आपत्ति जताई थी और कहा था कि अम्बेडकरवाद कोई संकीर्ण सोच नहीं है बल्कि एक विचारधारा है। डॉ. उदितराज ने कहा कि जितने मंत्री, एमपी, एमएलए, कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी, विद्यार्थी, कोटाधारी, सरपंच, मुखिया, पार्षद आरक्षण के कारण बने हैं अब उनकी परीक्षा का समय आ गया है अगर इनकी पूजा, कर्मकांड, दान आदि करते हैं तो तुरंत छोड़ दें या आरक्षण का त्याग करें वर्ना ये बेइमानी होगी। डॉ. अंबेडकर को धोखा देना माना जाएगा । जब मनुवादी चिल्लाकर कह रहे हैं अंबेडकर की सोच और अम्बेडकरवादी दुश्मन हैं अर्थात वो तिरस्कार कर रहे हैं तो फिर वहां गुलामी क्यों कर रहें हैं? इतने दुत्कार और फटकार के बाद शरण में पड़े रहोगे तो भेदभाव होगा ही, कीड़े- मकोड़े की जि़ंदगी जियोगे ।

असपा प्रमुख चन्द्रशेखर के बाद कांग्रेस नेता उदितराज ने शंकराचार्य पर साधा निशाना

आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भीम आर्मी प्रमुख चन्द्रशेखर आजाद ने कहा कि अम्बेडकरवाद कोई संकीर्ण सोच नहीं है बल्कि अम्बेडकरवाद समता, समानता, बंधुत्व और भाईचारे की एक ऐसी मानवतावादी विचारधारा है,जहां हर इंसान का स्वाभिमान और सम्मान सर्वोपरि है। हम ऐसा समाज चाहते हैं, जहां जन्म नहीं, कर्म और योग्यता की कद्र हो।

चन्द्रशेखर आजाद ने कहा कि वे ऐसा समाज और धर्म चाहते हैं जहां कोई भूखा न सोए, जहां किसी को उसकी जाति, धर्म या वर्ग के कारण दूसरे दर्जे का नागरिक न समझा जाए। उन्होंने कहा कि हम सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक गैर-बराबरी को जड़ से समाप्त करना चाहते हैं।

असपा प्रमुक ने कहा, अम्बेडकरवाद समता, समानता, बंधुत्व और भाईचारे की एक ऐसी मानवतावादी विचारधारा है, जहां हर इंसान का स्वाभिमान और सम्मान सर्वोपरि 

हम चाहते हैं कि इस देश के संसाधनों पर हर वर्ग की संख्या के अनुपात में न्यायपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित हो।यही सच्चा सामाजिक न्याय है। हमारी लड़ाई किसी जाति या धर्म से नहीं है। हमारी लड़ाई उस मनुवादी और शोषक विचारधारा से है जो सदियों से समाज को बांटती आई है और बराबरी के अधिकारों को कुचलती आई है। बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हमें सिखाया कि ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो। ‘आज वही रास्ता हमें अपनाना है। शिक्षा से चेतना आएगी, संगठन से ताकत बनेगी और संघर्ष से परिवर्तन होगा। चन्द्रशेखर आजाद ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि अंत में जीत हमारी ही होगी। सोने की चिडिय़ा कहलाने वाला मेरा देश एक बार फिर विश्व गुरु नहीं, बल्कि विश्व का सबसे बड़ा न्यायपूर्ण और समतामूलक राष्ट्र बनेगा। हम भारत को ऐसा देश बनाएंगे जो संसार को प्तशांति, प्तमैत्री और प्तसमानता का रास्ता दिखाएगा। यही हमारा संकल्प है।

 

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