मंदिर प्रवेश का कोई कदम-दर-कदम नियम नहीं : प्रो. रविकांत

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गांधी जी का कहना था कि ‘देवता के घर में आधा-अधूरा रास्ता नहीं होता

लखनऊ विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के प्रवक्ता प्रो. रविकांत ने कहा कि पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर के बाद, गांधी को रुढि़वादी हिंदुओं से हज़ारों की संख्या में पत्र मिले जो इस बात से आहत थे कि गांधी ने दमित वर्ग के लोगों को बहुत-सी छूटें दे दी हैं। बहुत सारे पंडितों और शास्त्रियों ने उनसे मिलकर उनसे कहा कि मंदिर प्रवेश का प्रश्न शास्त्रों के विरुद्ध है।

मद्रास से आए एक सज्जन ने गांधी से कहा कि वे बीच का एक रास्ता निकालें जिसमें ‘अछूतों’ को मंदिर के बाहर ध्वजा-स्थल तक जाने की इजाज़त हो (जो आमतौर पर मंदिर की चारदीवारी से अंदर लेकिन मंदिर से बाहर होता था), लेकिन उन्हें गर्भगृह तक जाने की इजाज़त न हो, जहाँ मूर्ति स्थापित होती है। गांधी ने इस पर जवाब दिया कि ‘देवता के घर में आधा-अधूरा रास्ता नहीं होता। मंदिर प्रवेश का कोई कदम-दर-कदम नियम नहीं है। यह बेशर्त और सबके लिए स्वतंत्रता होना चाहिए। अछूतों को सार्वजनिक पूजा-स्थलों पर वही समानता मिलनी चाहिए जो सवर्ण हिंदुओं को मिलती है। ‘ प्रो. रविकांत ने इस बातचीत का रामचंद्र गुहा की गांधी खंड-2, पृष्ठ -27 पर लिखे गये रेफरेंस को भी कोड किया है।

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