देश की दो बड़ी राजनैतिक पार्टियों जिसमें भाजपा एवं कांग्रेस के बिना सहयोग के बहुजन समाज की राजनीति कभी सफल नहीं हो सकती क्योंकि दोनों पार्टियों के पास मनी माफिया एवं मीडिया है
कमल जयंत
लखनऊ। सामाजिक संस्था मिशन सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष गंगाराम अम्बेडकर का कहना है कि हमारा अनुभव एवं चिन्तन है कि देश की दो बड़ी राजनैतिक पार्टियों जिसमें भाजपा एवं कांग्रेस के बिना सहयोग के बहुजन समाज की राजनीति कभी सफल नहीं हो सकती क्योंकि दोनों पार्टियों के पास मनी माफिया एवं मीडिया है बहुजन समाज के पास इन संसाधनों का अभाव है।
कांशीराम साहब एवं बहन मायावती जी के युग में तीन-तीन बार सरकार बनाने के लिए बसपा को भाजपा का समर्थन मिला
आजादी के बाद बाबा साहब के जमाने में रामा स्वामी पेरियार एवं बाबू जगजीवन राम को कांग्रेस पार्टी का सहारा था एवं मान्यवर कांशीराम साहब एवं बहन मायावती जी के युग में तीन-तीन बार सरकार बनाने के लिए बसपा को भाजपा का समर्थन मिला। वैसे आज के दलित समाज की सियासत में भाजपा का सहयोग प्राप्त किये बिना राजनीति एक दिव्य स्वपन की तरह हो गई है।
उनका कहना है कि बहुजन समाज में खासतौर पर शोषितों और वंचितों के साथ हो रहे अन्याय और अत्याचार के खिलाफ सडक़ से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लडऩे के लिए ही इस संस्था का गठन किया गया है।
उनकी संस्था यूपी के सभी जिलों में सक्रिय रूप से बहुजनों पर हो रहे अन्याय के खिलाफ आंदोलन कर रही है और उनके इस आंदोलन का नतीजा है कि इन वर्गों के साथ हो रही ज्यादती पर विराम लग रहा है और जिला पुलिस व प्रशासन इन वर्गोंं के साथ उत्पीडऩ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है।
गंगाराम अम्बेडकर का कहना है कि अन्याय और अत्याचार के खिलाफ तो उनका संगठन मजबूती से लड़ रहा है।
साथ ही बाबा साहब के अस्थिकलश को मौजूदा अम्बेडकर महासभा परिसर में बनाये रखने के लिए भी वह अपनी आवाज उठा रहे हैं। इस मामले में हाल ही मैंने संगठन के पदाधिकारियों के साथ केन्द्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह जी से मुलाकात की और अपनी बात उनके समक्ष रखी।

साथ ही उन्हें यह भी बताया कि बाबा साहब की अस्थियों से करोड़ों दलितों, पिछड़ों का आस्था जुड़ी है। ऐसे में बाबा साहब की अस्थियों को कहीं और शिफ्ट करना उनके अनुयायियों की भावनाओं को आहत करना होगा।
अम्बेडकर का कहना है कि बाबा साहब और कांशीराम जी के मूवमेंट के कारण बहुजन समाज में काफी जागरूकता आयी है और लोग शिक्षित भी हो रहे हैं, शिक्षित होने के कारण दलित, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज अपने अधिकारों के लिए किसी न किसी संगठन के साथ जुडक़र एकजुट हो रहा है।
ऐसे में यूपी में ही कई सामाजिक और राजनीतिक संगठन बहुजनों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। हमारा संगठन भी इन वर्गों के खिलाफ हो रहे अन्याय और अत्याचार को लेकर संघर्ष कर रहा है और इन्हें एक बैनर के नीचे एकजुट करने का प्रयास कर रहा है।
हमारे इस अभियान से लोग जुड़ भी रहे हैं और यही वजह है कि यूपी के सभी जिलों के साथ हिन्दी भाषी राज्यों में हमारा संगठन मजबूत हो रहा है और बहुजनों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है।
गंगाराम अम्बेडकर यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के ओएसडी भी रहे हैं और बसपा से नाता टूटने के बाद उन्होंने सामाजिक संगठन मिशन सुरक्षा परिषद के जरिए बहुजनों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाना शुरू कर दिया है।
