​बलरामपुर अस्पताल में ऐतिहासिक पहल, ‘हुई टेम्पोरल बोन डिसेक्शन’ कार्यशाला

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प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बलरामपुर जिला अस्पताल में पहली बार हुआ उच्चस्तरीय व अत्याधुनिक कार्यशाला का आयोजन

​लखनऊ। प्रदेश के प्रतिष्ठित बलरामपुर चिकित्सालय ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। चिकित्सालय परिसर में ‘टेम्पोरल बोन डिसेक्शन’ (Temporal Bone Dissection) कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।

उत्तर प्रदेश के समस्त जिला अस्पतालों के इतिहास में यह पहला अवसर है जब बलरामपुर अस्पताल में इस उच्चस्तरीय व अत्याधुनिक कार्यशाला का आयोजन हुआ है।

​कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन बलरामपुर चिकित्सालय के निदेशक डॉ. बी.के.एस. चौहान द्वारा किया गया। अपने संबोधन में निदेशक ने कहा कि जिला अस्पताल स्तर पर इस तरह के उच्च स्तरीय अकादमिक व व्यावहारिक प्रशिक्षण का आयोजन होना चिकित्सालय परिवार के लिए अत्यंत गर्व का विषय है।

​इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी, नाक, कान व गला (ईएनटी) विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु प्रताप सिंह तथा राजीव कुमार (प्रदेश प्रवक्ता – डीपीआरए, उत्तर प्रदेश एवं जिला अध्यक्ष – डीपीआरए) विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति एवं देखरेख में पोस्टग्रेजुएट (PG) विद्यार्थियों और युवा डॉक्टरों को कान की आंतरिक संरचनाओं तथा जटिल शल्य क्रिया (सर्जरी) की बारीकियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

​कान के जटिल ऑपरेशनों में मिलेगी बड़ी सफलता

ईएनटी (ENT) के पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रम में टेम्पोरल बोन डिसेक्शन का प्रशिक्षण बेहद महत्वपूर्ण एवं आवश्यक माना जाता है।

बारीक तकनीकों का प्रशिक्षण : इस कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को कान की अंदरूनी व अत्यंत संवेदनशील संरचनाओं को निकटता से समझने का अवसर मिला।

​सर्जनों की दक्षता में वृद्धि : यहाँ सीखे गए कौशल से भविष्य में कान के जटिल ऑपरेशनों को अधिक सटीकता और सफलता के साथ अंजाम दिया जा सकेगा।

​इस सफल आयोजन से न केवल युवा चिकित्सकों के हुनर में निखार आएगा, बल्कि आम जनता को भी अत्याधुनिक व उच्च स्तरीय ईएनटी चिकित्सा सुविधाओं का सीधा लाभ प्राप्त होगा।

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