संघ मुख्यालय के सामने मनुस्मृति की प्रतियां और RSS की  ड्रेस जलाकर ​ डोमा परिसंघ का जोरदार विरोध प्रदर्शन

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किसी भी व्यक्ति का जाति के आधार पर अपमान केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे दलित समाज का अपमान : उदितराज

नई दिल्ली। हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे के अपमान तथा इस घटना के खिलाफ आवाज उठाने पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विरुद्ध FIR दर्ज किए जाने के विरोध में सोमवार को अखिल भारतीय दलित, ओबीसी एवं माइनारटीज परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. उदित राज (पूर्व सांसद),  के नेतृत्व में RSS मुख्यालय के सामने सैकड़ों साथियों के साथ जोरदार प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने RSS की ड्रेस और मनुस्मृति की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारे लगाए—“देश मनुस्मृति से नहीं, भारतीय संविधान से चलेगा।”

डोमा परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. उदितराज ने कहा कि एक ओर संविधान, सामाजिक समानता और सम्मान खत्म करने की साजिश की जा रही है। वहीं दूसरी ओर इसके खिलाफ आवाज उठाने वालों पर ही FIR दर्ज की जा रही है। यह स्थिति “एक तो चोरी, ऊपर से सीनाज़ोरी” वाली कहावत को चरितार्थ करती है।

डॉ. उदित राज ने कहा कि हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद भाजपा से जुड़े लोगों द्वारा सभा स्थल का “शुद्धिकरण” कराया गया और बाद में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भी इस कार्रवाई का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि इस घटना के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आवाज उठाई और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई तथा FIR दर्ज करने की मांग की। लेकिन दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय श्री राहुल गांधी के खिलाफ ही FIR दर्ज कर दी गई, जो लोकतांत्रिक विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास है।

डॉ. उदित राज ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का जाति के आधार पर अपमान केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे दलित समाज का अपमान है। यह  संविधान में निहित समानता, गरिमा और सामाजिक न्याय के मूल्यों पर भी हमला है। RSS मुख्यालय के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे डॉ. उदित राज सहित कई नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लेकर पहाड़गंज थाने पहुंचाया। ऐसी कार्रवाई से संविधान, समानता, सामाजिक न्याय और सम्मान की रक्षा के लिए चल रही आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि “हम संविधान की रक्षा, सामाजिक समानता और प्रत्येक नागरिक के सम्मान के लिए अपनी आवाज पहले से भी अधिक बुलंद करेंगे।”

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