देश में संविधान समर्थक धर्म के साथ : कुंवर फ़तेह बहादुर

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संविधान का विरोध करने वाले लोग अधर्म का दे रहे साथ

आजमगढ़। जनपद आजमगढ़ के विधानसभा क्षेत्र सगड़ी के नगर पंचायत बिलरियागंज के के बालाजी बंधन मैरिज हॉल विकास खंड बिलरियागंज में सामाजिक संस्था बहुजन भारत के तत्वावधान में अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग के समग्र विकास में भारत के संविधान का महत्त्व विषय पर प्रबुद्ध जन सम्मेलन एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के शुरुआत में वहां मौजूद सभी लोगों ने खड़े होकर संविधान की शपथ ली।

कार्यक्रम के संयोजक अजय कुमार थे और कार्यक्रम की  अध्यक्षता गिरिजेश ने की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि भारतीय संविधान अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़ा वर्ग के सर्वागीण विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार है हमारे बीच जितनी समस्याएं हैं उन समस्याओं का समाधान केवल संविधान में ही है। क्या अच्छा है क्या बुरा है हमें अपने खुद आत्म चिंतन करने की जरूरत है, हमें यह समझना होगा कि आखिर कौन लोग संविधान का विरोध कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ आंबेडकर ने संविधान सभा के अंतिम भाषण में कहा था कि यह संविधान बहुत अच्छा है यदि इसे लागू करने वालों की नीयत एवं मन्शा अच्छी हो तो यह विश्व का सबसे अच्छा संविधान होगा यदि संविधान लागू करने वालों की नीयत एवं मन्शा अच्छी नहीं रही तो यह सबसे खराब संविधान साबित होगा।

यह संविधान वही लागू कर सकता है जो सरकार में है । इसीलिए सत्ता में काबिल होना जरूरी है। समाज के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है जब आपकी अपनी सरकार होगी तब आप संविधान में दिए गए अधिकारों को लागू कर सकेंगे।

कुंवर फ़तेह बहादुर ने कहा कि आप जानते हैं कि सरकारों की स्थापना आपके वोट के द्वारा ही होती है यह वोट का अधिकार संविधान ने दिया है, सत्ता की प्राप्ति वोट के माध्यम से ही संभव है।

इसी सत्ता को बाबा साहब अंबेडकर और कांशीराम जी ने मास्टर चाभी कहा था और सत्ता की इस मास्टर चाभी से ही हमे सारे अधिकार प्राप्त होंगे एवं हमारी समस्याओं का निवारण होगा।

इस मास्टर चाभी को प्राप्त करने के लिए पीडीए समाज को एकजुट होना पड़ेगा एकजुट होकर ही हम लोग संविधान विरोधी ताकतों को सत्ता से बेदखल कर पाएंगे।

उन्होंने कहा कि जब 1992 में बाबरी मस्जिद गिराई गयी और 1993 में यूपी में विधानसभा का चुनाव हुआ तब उस समय कांशीराम जी ने मुलायम सिंह जी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और राज्य में सपा-बसपा गठबंधन की सरकार बनाई। यह सरकार 1995 में संविधान विरोधी ताकतों के षड़यंत्र का शिकार हो गयी और सपा-बसपा अलग-अलग हो गयी।

यह हमें हमेशा ध्यान रखना होगा कि जो संविधान विरोधी ताकतें हैं वह दलितों, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज को एक नहीं होने देंगी। इन्हें अलग-अलग करने के लिए हर संभव साजिश करती रहेंगी , इससे बहुजन समाज के लोगों को सतर्क रहना होगा।

कुंवर फतेह बहादुर ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में जब सपा और बसपा फिर इकट्ठा हुई और यूपी में मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन संविधान विरोधी शक्तियों ने इन्हें ज्यादा दिनों तक एकजुट नहीं रहने दिया। एक महीने में बसपा ने इस गठबंधन को तोड़ दिया। इस गठबंधन को तोड़ने में मुख्य भूमिका संविधान विरोधी ताकतों की रही।

इसका नतीजा यह हुआ कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता में आई, सपा दूसरे नंबर पर आई और बसपा को करारी हार झेलनी पड़ी। विधानसभा की 403 में से मात्र एक सीट ही बसपा जीत पायी। जिससे यह स्पष्ट होता है कि जब-जब दलितों, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के बीच बिखराव होगा तो इसका सीधा लाभ संविधान विरोधी ताकतों को मिलेगा। वह जानते हैं कि अगर यह दोनों एक साथ हो जाएंगे तो हम सब सत्ता पर कभी काबिज नहीं हो पाएंगे।

2024 के लोकसभा चुनाव में संविधान विरोधी ताकतों का मनोबल इतना बढ़ा कि उनके लोग कहने लगे कि अगर 400 सीट मिल गई वे संविधान बदल देंगे। इसका प्रभाव दलितों, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज पर पड़ा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के लोगों को पता लगा संविधान बदलने की बात चल रही है और अखिलेश यादव ने जब PDA की बात कही तब अनुसूचित जाति पिछड़ा वर्ग ने मिलकर इंडिया गठबंधन में शामिल कांग्रेस-सपा गठबंधन को वोट किया। जिसकी वजह से सपा की 37 सीट आई और कांग्रेस को 6 सीट मिली। और इसी का परिणाम था कि भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया। हम लोगों को अपने वोट की कीमत समझनी पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि सभी को संविधान से सारे अधिकार मिले हैं खासतौर पर दलित, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज के अधिकारों की रक्षा संविधान से ही होती है, ऐसे में संविधान ख़त्म करने कि बात करने वाले लोग कमजोरों के अधिकारों को छीनने की बात करते हैं हमारा संविधान कमजोरों को अधिकार देता है। संविधान विरोधी ताकतें संविधान ख़त्म करके कमजोर वंचित और शोषित समाज के अधिकार को छीनना चाह रहे हैं।

संविधान विरोधी लोग तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। कैसे आपका अधिकार सीमित किया जाए और आपके वोट के अधिकार को खत्म किया जाए। अब हम लोगों को यह भी देखना पड़ेगा कि बाबा साहब ने जो वोट का अधिकार दिया है उस वोट के अधिकार में इतनी शक्ति है कि जिससे हम सत्ता की प्राप्ति कर सकते हैं। हम अपने वोट की ताकत से बच्चों के भविष्य का निर्माण कर सकते हैं, उस वोट को इतने सस्ते में किसी को ना दें। जैसे 5 किलो राशन मिल गया और ₹10000 मिल जाए तो उससे खुश होकर अपने वोट का सौदा ना करें।

कुंवर फ़तेह बहादुर ने कहा कि हम पीडीए की एकता को मजबूत बनाये ताकि यूपी में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सत्ता प्राप्त कर सकें, जिससे संविधान के अनुसार पीडीए समाज के मान-सम्मान और उनके अधिकार की प्राप्ति के लिए काम किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांशीराम जी का बहुजन समाज और अखिलेश यादव जी का पीडीए समाज दोनों एक ही है, इसलिए दलितों, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों को इससे भ्रमित होने की जरूरत नहीं है।

महँगी शिक्षा, परीक्षा में धांधली और रोजगार के कम अवसर के कारण सबसे बड़ा नुकसान छात्रों और युवाओं को हो रहा ; अनिरुद्ध सिंह

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि आज महँगी शिक्षा, परीक्षा में धांधली और रोजगार के कम अवसर के कारण सबसे बड़ा नुकसान छात्रों और युवाओं को हो रहा है। क्योंकि ऐसी लापरवाही उन्हें निराश  करती है और उनके आत्मविश्वास को भी चोट पहुंचती है इसलिए आज पीडीए  समाज को फिर से एकजुट होना होगा हमें अपनी शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के लिए बाबा साहब द्वारा दिए गए वोट के अधिकार की असली कीमत पहचाननी होगी। यह हमारे आने वाली पीढी का सवाल है।

हम अपने वोट को मुफ्त के अनाज और पैसों के लालच के बदले नहीं बेच सकते अगर हम ऐसा करते हैं तो ये आने वाली पीढ़ी के अधिकार का अपमान होगा। संविधान की जरूरत PDA समाज को ही है। क्योंकि जबतक संविधान रहेगा तभी तक PDA समाज के अधिकार रहेंगे। इसलिए साथियों इन मुट्ठी भर संविधान विरोधी ताकतों को सत्ता से बाहर निकालने का समय आ गया है और उसका तरीका हम सबके सामने पहले से ही मौजूद है।

मान्यवर कांशीराम जी ने जो 85 15 का फार्मूला दिया वह आज भी सत्ता पाने की चाभी है। जिसके अनुसार भारत में 85 लोग PDA समाज से आते हैं। जिसमें पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय आते हैं। अगर यह संगठित हो जाएं और या खुद सत्ता में हों तो वह अपने विकास और भविष्य खुद सुरक्षित कर सकेंगे। अच्छी शिक्षा, अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं और सम्मानजनक रोजगार पा सकेंगे। इसलिए एक बार फिर हमें PDA समाज को शिक्षित करना होगा। संगठित करना होगा और फिर जब साथ में मिलकर संघर्ष होगा। तब जाकर PDA को पुनः राजनीतिक शक्ति मिल सकेगी।

अंत में एक बार फिर मैं अपने युवा भाइयों और बहनों से कहना चाहता हूं कि आइये हम सब मिलकर कंधे से कंधा मिलाकर चलें आपकी ऊर्जा मेहनत और संकल्प से हम एक बेहतर और मजबूत समाज का निर्माण कर सकते हैं। साथ ही मैं अपने बुजुर्गों और वरिष्ठ जनों से विनम्र निवेदन करता हूं कि वह हमें अपना आशीर्वाद और मार्गदर्शन देते रहें। आपका अनुभव और स्नेह ही हमारी सबसे बड़ी प्रेरणा और शक्ति है। यह हमारे जीवन से जुड़े हुए महत्वपूर्ण बिंदु हैं, इस पर हमको मिलकर विचार करना चाहिए। जय भीम  जय संविधान जय हिंद।

कार्यक्रम को जीएस प्रियदर्शी, देवचंद्र राम, राम नवल, डॉ सरोज, राजबली रामसूरत, आदि लोगों ने आदि लोगों ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन लालसाराम पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने किया। कार्यक्रम स्थल पर बुधीराम, ओंकार राम भवन, जितेंद्र कुमार, उमाशंकर गौतम, दूधनाथ पासवान, दिनेश बड़े बाबू, सिधारी राम मानपुर, डॉक्टर तिलाधारी, राजकुमार सचिव, जय राम यादव, अजीत कुमार अमित कुमार प्रदीप कुमार सभासद, सुरेंद्र प्रजापति सभासद बिलरियागंज, राजू पासवान सभासद बिलरियागंज डॉक्टर जयराम बिलरियागंज, राजेंद्र प्रसाद बिलरियागंज, मिथिलेश कुमार बिलरियागंज, भीम यादव सभासद बिलरियागंज, अनिल मास्टर बिलरियागंज आदि लोग उपस्थित रहे।

 

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