चयन समितियों में आरक्षित वर्ग के सदस्यों के जरिए ही दलितों, पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को बताया जा रहा अनउपयुक्त ( नॉट फाउंड सूटेबल )
कमल जयंत
लखनऊ। अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति चिकित्सा शिक्षक एसोसिएशन के महासचिव एवं केजीएमयू (डेन्टल) में प्रोफेसर डॉ. हरीराम का कहना है कि संघ लोक सेवा आयोग और राज्य के लोक सेवा आयोगों की चयन समिति / पदोन्नति समिति में आरक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व होना चाहिये। उनका कहना है कि अभीतक सभी विश्वविद्यालयों में चयन आरक्षित वर्ग का प्रतिनिधि चुनाव के माध्यम से आना चाहिए न कि मनोनयन से।
उनका कहना है कि लेकिन आयोगों की चयन समितियों में आरक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व सिर्फ दिखावे मात्र के लिए किया जाता है। जिसकी वजह से ये समितियां आरक्षित वर्ग के अभ्यार्थियों को अनउपयुक्त कह कर चयन नहीं करती हैं। परिणाम स्वरुप आज देश के विश्वाविद्यालयों में आरक्षित वर्ग के कुलपतियों, निदेशकों और शिक्षकों का कोटा पूरा नहीं हो पाया है और उनका प्रतिनिधित्व बहुत ही कम है।
उनका कहना है कि चयन समिति में मौजूद अनुसूचित जाति के प्रतिनिधि ही अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों का चयन करें और पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधि ही पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों का चयन करें, लेकिन दुर्भाग्य है कि चयन समितियों में चेयरमैन और अधिकांश सदस्य सवर्ण होते हैं और अभ्यर्थियों के चयन में इन्हीं का सिक्का चलता है, जिसकी वजह से समिति के लोग अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों के लिए नाट फाउंड सुटेबल यानि कि अनउपयुक्त दिखाकर इनका चयन नहीं करते हैं। जिसकी वजह से चिकित्सा विश्वविद्यालयों व अन्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में आरक्षित वर्ग के दलित व पिछड़ा समाज के अभ्यर्थियों का चयन नहीं हो पाता और इनकी आरक्षित सीटों पर सवर्णों का चयन कर दिया जाता है।
डॉ. हरीराम का कहना है कि उन्होंने इस अव्यवस्था और आरक्षण चोरी के मुद्दे पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को पत्र के माध्यम से अवगत भी कराया है। उम्मीद है कि दलितों और पिछड़ा के लिए आरक्षित सीटों की चोरी रुकेगी, क्योंकि राज्य और केन्द्र की सरकार की सबका साथ सबका विकास की स्पष्ट नीति है परन्तु कुछ आरक्षण विरोधी जातिवादी असामाजिक तत्व सरकार की मंशा के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं।
डॉ. हरीराम ने प्रधानमंत्री और यूपी के मुख्यमंत्री से यह भी आग्रह किया है कि वे दलितों व पिछड़ा वर्ग का आरक्षण चोरी करके सरकार की छवि खराब कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह पहला मौका नहीं है जब वे इस मुद्दे पर अपनी बात को प्रमुखता से उठा रहे हैं। इससे पहले भी वे केन्द्र व यूपी सरकार को पत्र के माध्यम से इस गड़बड़ी के बारे में अवगत करा चुके हैं।
