तंबाकू के दुष्प्रभावों से दुनिया को बचाने के लिए इस विशेष दिवस की शुरुआत की गई थी

”शौक की खातिर जो तुम खुद को धुएं में उड़ाते हो,
वो सिर्फ धुआं नहीं, अपनों की खुशियां जलाते हो।
चुन लो आज ही रास्ता ज़िंदगी का ऐ दोस्त,
क्यूं मौत के इस सामान को गले से लगाते हो।”
लखनऊ। डिप्लोमा फार्मासिस्ट राजपत्रित अधिकारी एसोसिएशन (डीपीआरए) के प्रांतीय प्रवक्ता राजीव कुमार कनौजिया ने कहा कि विश्व तंबाकू निषेध दिवस के इस पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश, पूरे देश और विश्व समुदाय को स्वास्थ्य और सतर्कता का यही संदेश है कि सभी लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।
सलाह: तंबाकू छोड़ना मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं। आज चिकित्सा विज्ञान में निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT) और बेहतरीन काउंसलिंग उपलब्ध है। इस लत को पीछे छोड़ने के लिए आप किसी भी समय हमसे या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क कर सलाह ले सकते हैं।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस का इतिहास
राजीव कुमार कनौजिया ने कहा कि तंबाकू के दुष्प्रभावों से दुनिया को बचाने के लिए इस विशेष दिवस की शुरुआत की गई थी, जिसका इतिहास इस प्रकार है:
शुरुआत और स्थापना: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 1987 में एक प्रस्ताव पारित किया, जिसके तहत दुनिया का ध्यान तंबाकू महामारी और उससे होने वाली मौतों की ओर आकर्षित करने का फैसला लिया गया।
पहली तारीख (7 अप्रैल): आधिकारिक तौर पर पहला ‘विश्व धूम्रपान निषेध दिवस’ 7 अप्रैल 1988 को मनाया गया था। इसका उद्देश्य लोगों को कम से कम 24 घंटे के लिए तंबाकू उत्पादों के उपयोग से पूरी तरह दूर रखना था।
31 मई की घोषणा: 17 मई 1989 को विश्व स्वास्थ्य सभा (World Health Assembly) में एक नया प्रस्ताव पास किया गया, जिसके तहत हर साल 31 मई को ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ (World No Tobacco Day) के रूप में मनाने की घोषणा की गई। तब से लेकर आज तक, पूरी दुनिया में इसी तारीख को यह अभियान चलाया जाता है।
महत्व: हर साल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इसके लिए एक विशेष ‘थीम’ (Theme) तय करता है, जिसके आधार पर वैश्विक स्तर पर तंबाकू कंपनियों के खिलाफ और सार्वजनिक स्वास्थ्य के पक्ष में नीतियां बनाई जाती हैं।

एक स्वास्थ्य पेशेवर की नज़र से: कड़वी सच्चाई और विशेष बातें
राजीव कुमार कनौजिया ने कहा कि चिकित्सालय के गलियारों में एक मुख्य फार्मेसिस्ट के रूप में, मैंने तंबाकू के कारण उजड़ते हुए हंसते-खेलते परिवारों का दर्द बहुत करीब से देखा है। तंबाकू का हर एक कश और हर एक दाना इंसान को मौत के मुंह की ओर धकेलता है।
अपनों का क्या कसूर (पैसिव स्मोकिंग): जब आप बीड़ी या सिगरेट पीते हैं, तो उसका धुआं आपके आस-पास बैठे आपके बच्चों, पत्नी और बुजुर्गों के फेफड़ों को भी समान रूप से बीमार करता है। आपकी इस जानलेवा लत की सजा आपके मासूम परिवार को क्यों मिले?
आर्थिक और मानसिक बर्बादी: तंबाकू या गुटखे पर रोज़ होने वाला छोटा सा खर्च शुरुआत में महसूस नहीं होता, लेकिन बाद में इसके कारण होने वाले कैंसर, हार्ट अटैक और दमा जैसी बीमारियों के इलाज में जीवन भर की गाढ़ी कमाई और घर-मकान तक बिक जाते हैं।

“लत ये तंबाकू की बड़ी नादान है,
सस्ती सी ये चीज़, पर लेती जान है।
छोड़कर इसे आज ही मुस्कुराओ तुम,
इसी में छिपी तुम्हारे परिवार की शान है।”
मेरा आह्वान (Appeal)
राजीव कुमार कनौजिया ने कहा कि आइए, हम सब सिर्फ एक दिन का नाटक न करें, बल्कि जीवन भर के लिए तंबाकू को अलविदा कहने का सच्चा संकल्प लें। हमारे देश के युवाओं से मेरा विशेष आग्रह है कि वे किसी के बहकावे में आकर या ‘दिखावे’ के चक्कर में इस धीमे ज़हर को गले न लगाएं। आपका जीवन देश और आपके परिवार के लिए बेहद कीमती है।
”तंबाकू को कहें ना, जिंदगी को कहें हाँ!”
