दुर्गासप्तशती में बड़े-बड़े गूढ़ रहस्य व साधन छिपे हैं

शिवचरण चौहान
श्रद्धा भक्ति और एकाग्रता से जो लोग दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं उन्हें अद्भुत मानसिक शांति और शक्ति मिलती है। यदि दुर्गा सप्तशती का पाठ पूरे वर्ष भर ना किया जा सके शारदीय नवरात्र और वासंती नवरात्र में इसका पाठ करने से अद्भुत शक्ति प्राप्त होती है। मन में शांति आती है । चित्त निर्मल होता है और कार्य सिद्धि होती है। आस्था श्रद्धा और भक्ति ही इसका मूल् उद्देश्य है। जग कल्याण के लिए क्या हुआ कोई मनोरथ अधूरा नहीं रहता।
दुर्गासप्तशती में बड़े-बड़े गूढ़ रहस्य व साधन छिपे हैं । कर्म ,भक्ति और ज्ञानरूपी त्रिवेणी की मंदाकिनी प्रवाहित करने वाला यह महान ग्रंथ देवी भक्तों के लिए कल्पतरू के समान है। हमारे पुराणों में उल्लेख मिलता है कलियुग में चंडी और सिद्धि विनायक की सेवा ,पूजा शीघ्र फल देने वाली है। दुर्गा शक्ति की देवी है। दुर्गा पूजा हेतु दुर्गा के सात सौ महामंत्र वाला ग्रंथ सप्तशती धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष इन चारों पुरुषार्थो
को देने वाला है । दुर्गा को जयंती, मंगला, काली, भद्रकाली कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवाधात्री, स्वाहा और स्वधा इन महत्वपूर्ण नामों से भी पुकारा जाता है।
प्रथम जो सबसे उत्कृष्ट एवं विजय प्रदान करने वाली है वह मां जयंती है। द्वितीयं जोअपने भक्तों के जन्म-मरण आदि बंधनों से मुक्ति प्रदान करती है वह देवी’मंगला’ है। तृतीयं जो प्रलयकाल में सारी सृष्टि को अपना ग्रास बना लेती है वह मां ‘काली’ है। चतुर्थम जो अपने भक्तों को सुख प्रदान कर उनका मंगल चाहती है वह भद्रकाली है। पंचम जो हाथ में कपाल तथा मुंडमाला धारण करने वाली मां कपालिनी है। षष्टीम जो अष्टांगयोग, कर्म और उपासना रूप दुःसाध्य साधन से प्राप्त होती है वही दुर्गा देवी है। सप्तम जो भक्तों के सारे अपराध क्षमा करती है उनका नाम क्षमा है। अष्टम जो सबका कल्याण करती है वही शिवा है। नवम जो सभी प्रपंचों को धारण करती है वही धात्री है। दशम 10 यज्ञ में देवताओं को स्वाहा रूप से पोषण करने वाली माता ‘स्वाहा’ है एवं पितरों का पोषण करने वाली स्वधा है। मां के इन स्वरूपों का स्मरण करने से समस्त कष्टों का निवारण होता है। मन शांत हो निर्मल होता है। शरीर में तेज और बल आता है। शक्ति का स्फुरण होता है। दुर्गा सप्तशती का नियमित पाठ करना थोड़ा कठिन जरूर लगता है किंतु यह अत्यधिक फलदाई है। रोग शोक विनाश करने वाला है तथा भक्ति और शक्ति प्रदान करता है। भगवान राम ने भी शक्ति की आराधना की है। शक्ति की निर्मल और निश्चल मन से की गई आराधना कभी व्यर्थ नहीं जाती।