दलित, पिछड़ा परीक्षा पास करके भी नौकरी पाये तो अयोग्य
लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज, आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने कहा कि शुक्ला, चतुर्वेदी और मिश्रा जज बने, लेकिन क्या कोई लिखित परीक्षा या साक्षात्कार हुआ? जो लोग सबकी मेरिट का मूल्यांकन करते हैं क्या उनकी अपनी कोई मेरिट है? वहीं दलित व पिछड़ा वर्ग परीक्षा पास करके नौकरियों में आता है तो उसमें भी यही वर्ग ये कहता है कि ये अयोग्य हैं क्योंकि ये आरक्षण के जरिए नौकरियों में आये हैं।
उदितराज ने कहा कि अब तो सवर्णों के लिए इस सरकार ने ईडब्ल्यूएस के नाम पर दस फीसदी आरक्षण कर दिया है, लेकिन सवर्ण इस आरक्षण की बात कभी नहीं उठाते हैं।उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों से जाति और भाई-भतीजावाद पर आधारित मेरिट व्यवस्था अभी भी चल रही है, और जैसे ही दलित और ओबीसी को थोड़ा-सा आरक्षण मिला, लोगों को समस्या होने लगी। उन्होंने कहा कि अभी यूपीएससी ने सिविल सेवा का परिणाम घोषित किया, और साक्षात्कार में द्रोणाचार्य जैसा चरित्र देखने को मिला। सितंबर 2025 में, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के विधि संकाय के तीन पूर्व छात्रों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इन जजों में लक्ष्मीकांत शुक्ल (1994) स्वरूपमा चतुर्वेदी (2001 एलएलएम और प्रशांत मिश्रा (1995) शामिल हैं।