जब हिस्सेदारी देने की बात आती है तो क्या हम हिंदू नहीं रहते : उदितराज

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कार्मिक मंत्रालय ने संसद में कहा इंटरव्यू बोर्ड को किसी उम्मीदवार की कैटेगरी और लिखित परीक्षा के अंक की जानकारी नहीं होती

लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज, आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने कहा कि यूपीएससी का फाइनल रिजल्ट आ गया है और बड़े पैमाने पर एससी, एसटी और ओबीसी के प्रतियोगियों में फिर से वही निराशा और चर्चा छाई हुई है। इंटरव्यू में इस बार भी इनके नंबर सामान्य वर्ग के मुकाबले कम मिले हैं, जैसा कि पहले भी होता रहा है। कार्मिक मंत्रालय ने संसद में कहा है कि इंटरव्यू बोर्ड को किसी उम्मीदवार की कैटेगरी और लिखित परीक्षा के अंक की जानकारी नहीं होती, इसलिए भेदभाव की संभावना नहीं है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बताती है।

लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बताती है, वर्षों से यह भेदभाव चला आ रहा है 

उन्होंने कहा कि मैं भी यूपीएससी पास कर चुका हूं और मेरा अनुभव भी यही कहता है कि कुछ तो बात है। जब हिस्सेदारी देने की बात आती है तो क्या हम हिंदू नहीं रहते? वर्षों से यह भेदभाव चला आ रहा है और इसका अंत होता हुआ दिखाई नहीं देता। श्री नेत्रपाल ने इस मामले में गहराई से अध्ययन किया है जो चौकने वाला है। मैं श्री राहुल गांधी से भी आग्रह करूंगा कि इस मामले को उठायें, हालांकि उनके अलावा कोई और इतना संवेदनशील नहीं है।

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