बसपा ने तेज की कांशीराम जी की जयंती पर आयोजित रैलियों की तैयारियां
लखनऊ। बहुजन नायक कांशीराम जी की जयंती 15 मार्च को है। इस मौके पर बहुजन समाज पार्टी ने लखनऊ और नोएडा में दो बड़ी रैली करने का निर्णय लिया है। इन रैलियों को यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के अभियान की शुरुआत माना जा रहा है। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मायावती इन रैलियों में से किसी एक रैली में शामिल होंगी।

बाबा साहब के निर्वाण दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में नहीं शामिल हुईं थीं बसपा प्रमुख
यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि पिछले साल नौ अक्टूबर को कांशीराम जी के महानिर्वाण दिवस के मौके पर बसपा प्रमुख ने एक बड़ी रैली का आयोजन किया था। भीड़ के लिहाज से इस रैली को सफल भी माना जा रहा था, क्योंकि इस रैली में भारी जनसमूह एकत्र हुआ था, लंबे समय से मायावती द्वारा कोई भी सार्वजनिक कार्यक्रम न किये जाने के कारण बहुजन समाज के लोग काफी निराश थे, लेकिन जैसे ही मायावती ने रैली की घोषणा की प्रदेशभर से बहुजन समाज के लोग रैली में जुट गये। इसी के तुरंत बाद छह दिसंबर को बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के महानिर्वाण दिवस के मौके पर मायावती ने राज्य के पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिये कि छह दिसंबर को बारह मंडलों के कार्यकर्ता लखनऊ और छह मंडलों के कार्यकर्ता नोएडा में आयोजित रैली में एकत्र होंगे। इन दोनों स्थानों पर कार्यकर्ता तो जुटे लेकिन मायावती किसी भी रैली या शोकसभा में शामिल नहीं हुईं। उन्होंने अपने आवास से ही बाबा साहब को श्रद्धासुमन अर्पित करके बहुजन समाज के नाम एक संदेश जारी कर दिया।

विधानसभा चुनाव के मद्देनजर रैली में शामिल हो सकतीं हैं मायावती
बसपा प्रमुख बाबा साहब के निर्वाण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल नहीं हुईं। इसके बाद उन्होंने एक बयान जारी करके कहा कि उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होने से कार्यक्रम में आने वाले लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है इसलिए उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों में शिरकत न करने का फैसला लिया है। अब चूंकि पार्टी के संस्थापक कांशीराम जी की जयंती के मौके पर बसपा ने दो रैलियां करने का निर्णय लिया है। सवाल यह उठता है कि क्या मायावती इन रैलियों में जुटने वाली भीड़ को ध्यान में रखकर अपने निर्णय के मुताबिक इन रैलियों में शामिल नहीं होंगी और अपने आवास से ही पार्टी के संस्थापक कांशीराम जी को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगी या राज्य में विधानसभा के चुनाव करीब हैं, इसको ध्यान में रखकर वे अपनी इस रणनीति में बदलाव करके यूपी में अपनी सियासी ताकत का प्रदर्शन करेंगी।