नेशनल जुडिशियल कमीशन बहाल करने से कतरा रही सुप्रीम कोर्ट : उदितराज

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कॉन्स्टिट्यूशन बेंच अडानी-अंबानी के लिए बन रही है

लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज, आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने कहा कि 23 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और वरिष्ठ अधिवक्ता मैथ्यू नेदुम्परा के बीच तीखी बहस हुई। कोलेजियम प्रणाली को चुनौती देने वाली एक याचिका का उल्लेख करते समय नेदुम्परा ने टिप्पणी की कि कॉन्स्टिट्यूशन बेंच अडानी-अंबानी के लिए बन रही है आम आदमी के लिए नहीं। आम आदमी की कोई सुनवाई नहीं है । इस पर सीजेआई भड़क गए। नेदुम्परा ने नेशनल जुडिसियल कमीशन को बहाल करने वाली याचिका का जिक्र किया, जबकि सीजेआई ने कहा कि ऐसी कोई याचिका पंजीकृत नहीं है। जबकि सच्चाई यह है कि नेदुम्परा ने याचिका दाखिल किया है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामले में रुचि कहां है? यूजीसी नियम को रोकने में देरी नहीं लगी। ऐसे वकील को सलाम किया जाना चाहिए जो आम जनता के लिए आवाज़ उठाने का साहस रखते हैं।

इतिहास को इतिहास रहने दीजिए मोदी जी

उदितराज ने कहा कि पीएम मोदी चाहते हैं कि देश को गुलामी की निशानियों से मुक्त किया जाए। मैं इससे सहमत हूँ बशर्ते यह काम आधा अधूरा न हो। राष्ट्रपति भवन से प्रसिद्ध ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस की प्रतिमा हटा दी गई है। उनकी जगह गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा स्थापित की गई है। बिना हटाए भी राजगोपालाचारी जी की प्रतिमा लगाई जा सकती थी। पीएम मोदी ने कहा कि देश गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि इतिहास का अर्थ है बीते हुए समय में घटित घटनाओं का व्यवस्थित, क्रमबद्ध और साक्ष्य आधारित अध्ययन। इतिहास में सब कुछ अच्छा ही नहीं होता, उसका दूसरा पहलू भी होता है। सत्ता ऐसे लोगों के हाथ में आ गई है जैसे बंदर के हाथ में उस्तरा। महान आर्किटेक्ट लुटियंस ने जो निर्माण किया वैसा न इनके पुरखे बना पाए थे और न ही भविष्य में बना पाएँगे। लुटियंस ने पश्चिमी नवशास्त्रीय शैली को मुगल, बौद्ध और हिंदू रूपांकनों के साथ मिलाकर राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, गोलाकार कनॉट प्लेस और किंग्सवे का निर्माण किया।

डोमा प्रमुख ने कहा कि मोदी जी, स्कूल, विश्वविद्यालय, रेल, फौज, संसदीय प्रणाली और वह सब कुछ जिसका आज इस्तेमाल हो रहा है इनमें आपके पुरखों का कितना योगदान है? प्रथम बालिका स्कूल की स्थापना ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले ने की थी जिसका आपके पूर्वजों ने कड़ा विरोध किया। लुटियंस की प्रतिमा हटाइए लेकिन ब्रिटिश काल में स्थापित सारी व्यवस्थाओं से भी बाहर आइए। सबसे पहले सभी बीजेपी और आरएसएस के बच्चों को अंग्रेज़ी माध्यम के स्कूलों और विश्वविद्यालयों से निकालकर गुरुकुलों में भेजिए जहां वे संस्कृत माध्यम से पढ़ें। आपके मंत्री और सांसदों के बच्चे जो विदेश में पढ़ रहे हैं उन्हें भी वापस बुलाइए। कुछ नया बना नहीं सकते तो कम से कम बर्बाद तो मत कीजिए। इतिहास को इतिहास रहने दीजिए वरना एक समय ऐसा आएगा जब आपके साथ भी यही होगा।

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