ब्राह्मणों द्वारा शूद्रों को अपमानित करना मनुस्मृति के हिसाब से सही : उदितराज
लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज, आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने देश की मनुवादी व्यवस्था पर तंज करते हुए सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि इटावा में यादव जी चले थे कथा सुनाने और इनका स्वागत ब्राह्मणों ने सिर का बाल काटकर और मूत्र छिडक़कर उन्हें शुद्ध करके किया। दूसरे यादव भाई रीवा के जो एक फिट लंबी चोटी लेकर घूम रहे थे और पांडे जी ने उखाड़ डाला।
भारतीय संविधान के हिसाब से बड़ा अपराध
ऋग्वेद, मनुस्मृति और वर्ण व्यवस्था के हिसाब से तो कोई ग़लत नहीं किया और संविधान के अनुसार ये बड़ा अपराध है। जाति व्यवस्था के अनुसार तो केवल ब्राह्मण का ये अधिकार है लेकिन यादव जी उनके अधिकारों पर अतिक्रमण कर डाले। हिंदू राष्ट्र की मांग अभी कुछ ही लोग कर रहे हैं और यह शुरू की झांकी है। एक बार देश हिंदू राष्ट्र बन जाये तो क्या-क्या होगा अंदाज लगाना मुश्किल नहीं है। 400 सौ पार का नारा बीजेपी का 2024 के लोकसभा चुनाव में पूरा हुआ होता तो अब तक संविधान उड़ गया होता और ये अपराध की श्रेणी में न आता। बुद्ध, अंबेडकर, पेरियार, कबीर, फुले, साहू, ललई यादव की बात नहीं मानोगे तो इससे भी ज़्यादा होगा।
बहुजनों को बुद्ध, अंबेडकर, पेरियार, कबीर, फुले, साहू, ललई यादव की बात माननी होगी
इससे पहले डॉ. उदितराज आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर भी आपत्ति व्यक्त कर चुके हैं। उनका कहना है कि मोहन भागवत ने अपने बयान में कहा है कि ’भारत एक हिंदू राष्ट्र है, इसे संवैधानिक प्रमाण की जरूरत नहीं’ है। जबकि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर हिंदू राष्ट्र को भारतीय लोकतंत्र और समानता के लिए एक बड़ा खतरा मानते थे। डॉ. उदितराज ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि संघ प्रमुख भागवत के बयान के बाद भी जो दलित, पिछड़े और आदिवासी भाजपा में हैं वह तय करें कि वे संविधान के साथ हैं या मनुस्मृति के साथ।
भागवत ने कहा, भारत एक हिंदू राष्ट्र है, इसे संवैधानिक प्रमाण की जरूरत नहीं
उन्होंने कहा कि भाजपा की चाकरी कर रहे दलित, पिछड़ा और आदिवासी समाज के नेताओं को इस पर अपना स्पष्ट मत देना होगा, अगर वे मोहन भागवत के इस बयान पर भी चुप रहते हैं तो यह माना जाएगा कि वह डॉ. अंबेडकर के साथ गद्दारी कर रहे हैं। उन्होंने बहुजन समाज के लोगों का आह्वान किया कि समाज के वे लोग जो भाजपा में हैं आपको जहां भी मिलें उनसे सवाल पूछें, जवाब न दें तो इनका बहिष्कार करें और ऐसे लोगों को संविधान विरोधी घोषित किया जाए।
