माघ का महीना और महावट

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जब माघ महावट पड़ती हो, तब देख बहारें जाड़े की

शिवचरण चौहान  (वरिष्ठ पत्रकार )

सर्दियों में माघ के महीने में होने वाली बरसात को महावट कहते हैं। राजस्थान और हरियाणा में इसे मावट कहा जाता है। बुंदेलखंड ,अवध क्षेत्र और भोजपुरी भाषा भाषी क्षेत्रों में इसे महावट कहते हैं। लोक परंपरा के अनुसार महावट के 3 चरण होते हैं। पहले दो चरण बीत चुके हैं और यह तीसरा चरण चल रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के चलते हैं आसमान में बादल छाए हुए हैं। रुक रुक कर कहीं हल्की और कहीं भारी बौछारें पड़ रही हैं। कहीं-कहीं ओले गिरने से चना सरसों राई और अरहर की फसल को भारी नुकसान हुआ है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में महावट के कारण ही किसान बर्बाद हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश और पंजाब की सरकारें तो व्यस्त हैं तो किसानों का दर्द कौन सुने।

सदियों से महावट होती आई है। भूमध्य सागर में जब पश्चिमी विक्षोभ (कम हवा के दाब का चक्रवात बनता है) बनता है तो पछुआ हवाओं के साथ वह बादलों के रूप में हिमालय से आकर टकराता है। यही पश्चिमी विक्षोभ हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान ,उत्तर प्रदेश ,मध्य प्रदेश से लेकर बिहार तक महावट कराता है। वैसे तो महावट की बरसात सूखी जमीन की फसलों गेहूं, जौ की फसल को काफी लाभ पहुंचाता है किंतु अधिक मात्रा में पानी बरसने, ओले पड़ने और धूप न निकलने के कारण फसलों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

पश्चिमी विक्षोभ के कारण भूमध्य सागर से आए बादल पूर्व और उत्तर भारत में महावट कर रहे हैं। हल्की हल्की हवा चलने के कारण पारा गिरकर 2 डिग्री सेल्सियस तक आ गया है। भूमध्य सागर से हिमालय तक मैदान होने के कारण माघ के बादल सीधे हिमालय से टकराकर बारिश करते हैं। इस कारण समूचे उत्तर और पूर्वी भारत में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। न्यूनतम और अधिकतम तापमान में बहुत अधिक गिरावट होने के कारण पशु पक्षियों तक को कष्ट उठाना पड़ रहा है। फसलें बर्बाद हो रही है और पेड़ पौधे पाले के कारण सूख रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अभी कुछ दिन ऐसी ही स्थिति बनी रहेगी। जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों के कारण भी पश्चिमी विक्षोभ ज्यादा असर डाल रहा है।

नजीर अकबराबादी ने महावट का सही चित्रण किया है–
पैठी हो सर्दी रग रग में औ
बर्फ पिघलता हो पत्थर।
झड़ बांध महावट पड़ती हो
तिस पर लहरें ले ले कर,
सन्नाट माघ का चलता हो
तब देख बहारें जाड़े की।।
यह महावट की लहर भारत से लेकर जापान तक जाती है। और जापान में भी फुहारें पड़ती हैं।
प्रतीक्षा करिए चीन की तरह भारत भी कृतिम सूरज बना ले तो कड़ाके की ठंड से मुक्ति मिल सकती है।

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