ट्रांसजेंडरों को शिक्षा, रोजगार व कल्याण योजनाओं में मिले आरक्षण

Share

गरिमा और संवैधानिक अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरा एलजीबीटीक्यू समुदाय

लखनऊ। एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोगों ने लखनऊ में क्वीर प्राइड वॉक आयोजित किया। यह आयोजन एलजीबीटीक्यू समुदाय और सहयोगियों के दस वर्षों के संघर्ष, दृश्यता और एकजुटता का प्रतीक है। प्राइड वॉक दोपहर 2 बजे दैनिक जागरण चौराहे से प्रारंभ होकर 1090 चौराहे पर समाप्त हुई। इसमें समुदाय के सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं, अभिभावक, अधिवक्ता, मानसिक-स्वास्थ्य विशेषज्ञ, कलाकार एवं नागरिक समाज के सहयोगियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। यह प्राइड वॉक भारत के संविधान में निहित समानता, गरिमा और भेदभाव-मुक्त जीवन के अधिकार की शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति है।

क्वीर समुदाय ने सरकार और समाज के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें विवाह समानता समान-लैंगिक रिश्तों और साझेदारी को कानूनी मान्यता देने, जिससे परिवार, विरासत, सामाजिक सुरक्षा, गोद लेने और सम्मानपूर्ण जीवन के समान अधिकार सुनिश्चित करने की मांग सबसे प्रमुख है। इसके अलावा सार्वजनिक स्थलों और परिवारों में यौन अभिविन्यास एवं लैंगिक पहचान के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव पर रोक लगाने की मांग भी शामिल है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास, सार्वजनिक स्थलों और परिवारों में यौन अभिविन्यास एवं लैंगिक पहचान के आधार पर होने वाले सभी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने की मांग उठाई गई।

क्वीर समुदाय ने सर्वोच्च न्यायालय के नालसा बनाम भारत संघ (2014) के निर्णय के अनुरूप ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए शिक्षा, रोजगार और कल्याण योजनाओं में क्षैतिज आरक्षण लागू करने की मांग दोहराई। भारतीय न्याय संहिता में पुरुषों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के विरुद्ध यौन हिंसा, विशेषकर पुरुष बलात्कार, को मान्यता देते हुए आवश्यक कानूनी प्रावधान जोड़े जाने की मांग की गई। लखनऊ क्वीर प्राइड ने पिछले एक दशक में उत्तर भारत में एलजीबीटीक्यू समुदाय की आवाज़, अधिकार और दृश्यता को मजबूती से स्थापित किया है। 10वां प्राइड केवल उत्सव नहीं, बल्कि विरोध, प्रतिरोध और जवाबदेही की सामूहिक मांग के रूप में उभरा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *