मनुवादी ही जाति धर्म औ ऊंच नीच फैलाया है,अपने को चमकाने में ही औरों को दफनाया है

डॉ. यदुनाथ सुमन
जातिवाद में उलझा दिया है पूरा हिंदुस्तान।
इसीलिए संकट में है भारत का आम अवाम।।
छल प्रपंच को ढाल बनाकर सत्ता में जबसे आये,
मानवीय मूल्यों को तो ये कूट कूटकर लतियाये।
अपने सिवा ये नहीं चाहते औरों का उत्थान।
इसीलिए संकट में है भारत का आम अवाम।।
मनुवादी ही जाति धर्म औ ऊंच नीच फैलाया है,
अपने को चमकाने में ही औरों को दफनाया है।
इसने ही पशु से भी बद्तर बतलाया इंसान।
इसीलिए संकट में है भारत का आम अवाम।।
बीज स्वार्थ के उगा उगाकर वृक्ष कटीले कर डाले,
मातृभूमि के दामन पर डाले असंख्य धब्बे काले।
जाति धर्म की ज्वाला करती इस जग को वीरान।
इसीलिए संकट में है भारत का आम अवाम।।
महापुरुष जितने भी आए समता का संदेश दिए।
लेकिन हरामखोरो ने स्वारथ में सबको मेट दिए।
अपने को ही ये समझते इस जग का भगवान।
इसीलिए संकट में है भारत का आम अवाम।।
भ्रष्टाचार बढ़ा बढ़ाके वतन का सत्यानाश किया।
भौंहे फौरन पलट गईं जब किसी ने पर्दाफाश किया।
समझ रखा है वतन इसने लूट घसोट की खान।
इसीलिए संकट में है भारत का आम अवाम।।
दलितों के हित बातों पर हाय हाय ये करते हैं ?
देश समूचा निगल गए फिर भी भूखे ही मरते हैं।
अपना करते राजतिलक तो औरों का अपमान।
इसीलिए सकंट में है भारत का आम अवाम।।
पाखंडों में कब तक उलझोगे भोली जनता को,
फैल चुकी है लहर जागृति वापस लेंगे सत्ता को।
अपने हित में ही कर डाले देश का कत्लेआम,
इसीलिए सकंट में है भारत का आम अवाम।।
उमड़ पड़ी है प्रकृति भी सहते सहते दुष्कांड,
सूरज चाँद गगन धरती जल वायु अग्नि ब्रह्मांड।
जनता की लाशों पर करते स्वार्थ का अभिमान।
इसीलिए संकट में है भारत का आम अवाम।।
शोषितों लो हक अधिकार स्वाभिमान निहार रहा,
उठो वतन के वीर सपूतों वक्त तुम्हें पुकार रहा।
अज्ञानता अशिक्षा अनेकता का है घातक परिणाम।
इसीलिए संकट में है भारत का आम अवाम।।