गजाला हथियारों पर रोक की पक्षधर रहीं साथ ही बन्दूक़ के उपयोग का सदैव विरोध किया

मुहम्मद कमर खां
जार्जिया की लेफ्टिनेंट गवर्नर होकर गजाला फिरदौस हाशमी ने अमरीकी राजनीति में भारत के लिए स्थान सुनिश्चित किया, मेरठ के छोटे से गांव की रहने वाली एक मुस्लिम बहू गज़ाला ने मुस्लिम महिला के रूप में सिद्ध कर दिया कि शिक्षा, दृढ़ संकल्प एवं सही इरादे के साथ प्रयास करने वाला, कोई भी व्यक्ति विश्व में कहीं भी, और कभी भी अपनी सफलता के झण्डे लहराने के लिए सक्षम है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जिया हाशमी तथा तनवीर हशमी के घर गजाला का जन्म, जुलाई 1964 में हैदराबाद में हुआ था। जब वह मात्र 4 वर्ष की थीं तो अपनी मां और भाई के साथ जार्जिया आ गयीं जहां उनके पिता ही पहले शिक्षक के रूप में स्थापित हो चुके थे। यहां रह कर उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा पूर्ण की, तत्पश्चात तीस वर्षो तक वर्जीनिया में एक प्रोफेसर के रूप में पढ़ाती रहीं, इसी बीच अमरीका की राजनीति में उन्होने अपनी पैठ को आकर देना प्रारम्भ कर दिया। प्रोफ़ेसर पद से सेवानिवृत्त होने के उपरान्त, 2019 में गज़ाला ने अमरीकी राजनीति में आने का मन बना लिया।

राजनीति के अनतर्गत जनसेवा के रूप में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अबार्शन को माध्यम बनाया। विदेश में रहते हुये, वहां बसे हुए नागरिकों की ऐसी सेवा कर पाना, यद्यपि सरल प्रयास प्रतीत नहीं होता, परन्तु गज़़ाला हाशमी ऐसे प्रयासों में तल्लीन रहकर अपने ध्येय की ओर बढ़ती रही। जनसेवा के क्रम में अमरीका की डेमोक्रेटिक पार्टी में सदस्यता लेते हुए इसी वर्ष जून में उन्होंने प्राइमरी का चुनाव जीता। इससें पहले सन् 2004 में उन्हें सीनेट की स्वास्थ्य एवं शैक्षिक कमेटी का चेयर पर्सन बना दिया गया था। जबकि अद्यतन स्थिति यह है कि गज़ाला ने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जॉन ट्रीट को हराकर, लेफ्टिनेन्ट गर्वनर का पद हासिल किया। इस उपलब्धि को लेकर गज़ाला हाशमी ने अपनी बेबसाइट पर जानकारी दी, ’’दूसरों की जि़न्दगी को बेहतर बनाने के वास्ते, अपनी तमाम कोशिशें वक्फ की’’। साथ ही आवासीय समस्या की ओर ध्यान केन्द्रीयित रखने के साथ-साथ ’माहौलिया इन्साफ़़’ के अन्तर्गत ’असमानता’ के मुद्दे पर भी विरोध जारी रखा। वह हथियारों पर रोक की पक्षधर रही साथ ही बन्दूक़ के उपयोग का सदैव विरोध करती आयी हैं।’
आगे चल कर गज़़ाला हाशमी का विवाह, सरधना के अज़हर रफ़ीक खान के साथ सम्पन्न हुआ। अज़हर रफ़ीक खाँ़ कुलन्जन गांव के जमींदार परिवार से ताल्लुक़ रखते हैं। हालांकि अजहर वर्तमान में अपने परिवार के साथ अमरीका में ही रह रहे है। कुलन्जन के परिवार के अन्य सदस्यों को जब यह ज्ञात हुआ तो उनमें खुशी की नहर दौड़ गयी। मेरठ जिले के इस गांब में भी मिठाइंया बाँटी गयी और यहाँ भी जश्न मनाया गया। परिवार जनों एवं कुलन्जन गांव के वासियों ने ढोल-नगाड़े बनाते हुये, गज़़ाला की जीत पर अपनी प्रसन्नता प्रकट की। परिवारजनों में शादाब खाँ, डा. हैदर खाँ, अलमास खाँ, फरहा खानम, अनस खाँ, हुमा खाँ, अशमीरा खान, मारया हसन इत्यादि ने गज़ाला की इस सफलता पर, अपने-अपने अन्दाज से उन्हें बधाई देते हुए स्वागत किया। साथ ही इस प्रकार गौरान्वित करने हेतु सरधना की महिमा बखान, प्रसन्नतापूर्वक किया। कुलन्जन निवासियों का मानना है, कि गज़़ाला हाशमी की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी तक शिक्षा अर्जित करने व अपने ध्येय के लिए अथक प्रयास किये जाने की प्रेरणा गांव जनों को प्रदान करती रहेगी। तथा इन गांववासियों ने प्रार्थना की कि गज़ाला अपने नये पद पर रहते हुए भी समाज की उन्नति तथा उल्पसंख्यक हित के लिये सेवा करती रहें। अन्त मे मज़ूमन निगार साउथ एशिया की पहली मुस्लिम महिला के रूप में यह उपलब्धि अर्जित करने पर, गज़ाला हाशमी को बधाई देते हुए, उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता है।