समाज को नई राह दिखाएगी बहुजन पथ प्रदर्शक पुस्तक : कुंवर फतेह बहादुर

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बहुजन भारत कार्यालय पर हुआ रामकुमार गौतम की पुस्तक का विमोचन

लखनऊ। विश्व ज्ञान के प्रतीक,संविधान निर्माता, भारत रत्न बोधिसत्व बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर सामाजिक संस्था ‘बहुजन भारत ‘के कार्यालय में राम कुमार गौतम पूर्व एसडीएम लखनऊ के द्वारा संपादित पुस्तक ‘बहुजन पथ प्रदर्शक’ का विमोचन संस्था के अध्यक्ष कुंवर फतेह बहादुर, उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय कृष्ण कन्हैया पाल, महासचिव चिंतामणि, जगदेव सिंह, नवल किशोर आदि के द्वारा किया गया तथा पुस्तक की सफलता के लिए शुभकामनाएं दी गईं। इस मौके पर कुंवर फतेह बहादुर ने रामकुमार गौतम को पुस्तक लेखन के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि उनकी यह पुस्तक बहुजनों को राह दिखाएगी।

पुस्तक में 1857 की क्रांति के सूत्रधार मातादीन भंगी समेत 26 महापुरुषों का व्यक्तित्व एवं कृतित्व सारर्भित तरीके से प्रस्तुत किया गया है

बहुजन पथ प्रदर्शक ‘पुस्तक’ में बहुजन आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को व्यापक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। 1857 की क्रांति के महानायक मातादीन भंगी से लेकर वीरांगना ऊदा देवी पासी और झलकारी बाई जैसी वीरांगनाओं का उल्लेख करके स्वतंत्रता संग्राम में बहुजन समाज की भूमिका के महत्व को बताया गया है।  इन महान व्यक्तित्वों ने केवल विदेशी सत्ता के विरुद्ध संघर्ष ही नहीं किया बल्कि सामाजिक असमानता के विरुद्ध भी प्रतिरोध की मसाल जलाई। आदिवासी मसीहा गोविंद गुरु के द्वारा समानता और सामाजिक न्याय की भावना को जन-जन तक पहुंचाएं गए कार्य को बखूबी बताया गया है।

समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले और क्रांति ज्योति सावित्रीबाई फुले का योगदान भारतीय सामाजिक इतिहास की आधारशिला है,यह बताने का प्रयास किया गया है। समाज सुधारक नारायण गुरु साहू जी महाराज तथा  पुस्तक में आदिवासी चेतना के महानायक बिरसा मुंडा तथा संत परंपरा के धनी,स्वच्छता के जनक गाडगे बाबा, स्वामी अच्युतानंद हरिहर की सी रामास्वामी पेरियार चौधरी सर छोटू राम आज के द्वारा चलाए गए आंदोलनों की गरिमामई उपस्थित भी इस पुस्तक में मिलती है। पुस्तक में महामना रामस्वरूप यादव, पेरियार ललई सिंह यादव आदि की अंधविश्वास व पाखंडवाद पर तर्कवाद व बुद्धिवाद के द्वारा विजय प्राप्त करना तथा बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर व मान्यवर कांशीराम के मिशन मोमेंट को भी समझाने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक में 1857 की क्रांति के सूत्रधार मातादीन भंगी, वीरांगना ऊदा देवी पासी, वीरांगना झलकारी बाई, महात्मा ज्योतिबा राव फुले, क्रांति ज्योति सावित्रीबाई फुले, समाज सुधारक नारायण गुरु ,आदिवासी मसीह गोविंद गुरु, छत्रपति शाहूजी महाराज, बिरसा मुंडा ,संत गाडगे बाबा, ईवी रामास्वामी पेरियार,स्वामी अछूतानंद,चौधरी छोटू राम, बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर, सरदार उधम सिंह ,शिवदयाल सिंह चौरसिया, बाबू हरदास लक्ष्मण राव नगराले ,जोगेंद्र नाथ मंडल , शहीद ए आजम भग त सिंह, ललई सिंह यादव, बाबू बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल, बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा, महामना रामस्वरूप वर्मा, जननायक कर्पूरी ठाकुर ,भारत की प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षा का फातिमा शेख, बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम कुल 26 महापुरुषों का व्यक्तित्व एवं कृतित्व सारर्भित तरीके से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक का प्रकाशन, बुद्ध अंबेडकर कल्याण एसोसियेशन उत्तर प्रदेश के संपादक एवं प्रकाशक, ज्ञान प्रकाश जख्मी जी के द्वारा किया गया है।

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