दलितों को अपमानित करने वालों पर मेहरबानी का मरहम : उदितराज

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ब्लैकमेल करने वाली महिलाओं के बयान पर सीधे एफआईआर

लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज, आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट प्राय: दलित और पिछड़ों के मामलों में संसद और क़ानून बनाने वाली संस्थाओं द्वारा अधिकारों को कमजोर करने का निर्णय देता है। आज भी वही किया है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा केवल अपशब्दों का प्रयोग अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध नहीं है।

यह कानून तभी लागू होगा जब अपशब्दों में जातिगत नाम का प्रयोग सार्वजनिक रूप से किया गया हो और उसका इरादा अपमानजनक हो।डॉ. उदितराज ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि आज कल कितने हनी ट्रैप और महिलाएंं ब्लैकमेल कर रही हैं। दहेज कानून में एक तरफा बयानिया से जेल भेज दिया जाता है। इनके इकबालिया बयान किसी को बदनाम, जेल जाने के लिए पर्याप्त होता है लेकिन जब दलित- आदिवासी के लिए बने क़ानून की बात होती है तो उसको स्ष्ट कमजोर करता है। अनुसूचित जाति आयोग और जनजाति आयोग की शक्तियों को बार बार कमज़ोर किया गया है।

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