एक हो तो सेफ हो, बटोगे तो कटोगे’ इन जुमलों का क्या हुआ
लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज, आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने कहा कि एक हो तो सेफ हो, बटोगे तो कटोगे’ इन जुमलों का क्या हुआ? एक मामूली सा यूजीसी नियम, जो अभी लागू भी नहीं हुआ, उसके कारण ही इन नारों की हवा निकल गई। क्या दलित और पिछड़ा वर्ग के लोग हिन्दू नहीं हैं।

संघ के ही लोग भाजपा के यादव सीएम को भैंस चराने वाला बता रहे
नये यूजीसी के नियम में दलितों और पिछड़ा वर्ग के छात्रों को अपने साथ हो रहे अन्याय की शिकायत करने का अधिकार मिलेगा, इसलिए यही हिन्दूवादी लोग यूजीसी के विरोध में खड़े गये। इतना ही नहीं मध्य प्रदेश के शिवपुरी जि़ले में यूजीसी के खिलाफ संघ, एबीवीपी और बीजेपी समर्थकों द्वारा भाजपा के ही मुख्यमंत्री का महज इसलिए विरोध किया गया , क्योंकि वह यादव हैं। वहां नारे लगाए गए-‘मोहन यादव जाएगा और जाकर भैंस चराएगा।’ इतनी न$फरत! चले हैं हिंदू एकता करने! उन्होंने कहा कि दिल्ली के मॉरिस नगर थाने में यूजीसी नियम के समर्थन में खड़ी अंजलि मिश्रा के साथ पुलिस की मौजूदगी में कपड़े उतरवाने की बात कही गई और उन्हें मां की गाली दी गई। ये लोग कौन हैं? ये एबीवीपी के सदस्य और बीजेपी समर्थक थे।

यूट्यूबर रुचि तिवारी जंतर-मंतर में यूजीसी के समर्थन में हो रहे प्रदर्शन में जाती हैं और ‘पानी मिला’ जैसी टिप्पणी करती हैं, जिसका मतलब बहुजन समाज का अपमान करना है। इसके बाद अंजलि मिश्रा, जो समर्थन में थीं, उन्हें पटक दिया गया। उदितराज का कहना है कि गोदी मीडिया के कुछ पत्रकारों का छुपा हुआ जातिवादी चेहरा सामने आ गया। बिना पूरी जानकारी के कई लोग रुचि तिवारी के समर्थन में उतर आए। कई दिनों से लाखों एससी, एसटी और ओबीसी युवा और छात्र यूजीसी नियम के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन यह खबर मीडिया से लगभग गायब है।
संविधान ने सबको दिया है अपनी बात कहने का अधिकार
रुचि तिवारी जानबूझकर कवरेज के बहाने यूजीसी समर्थन वाले प्रदर्शन में जाती हैं, ताकि झगड़ा हो और लोगों का ध्यान असली मुद्दे से भटक जाए। क्या तथाकथित सवर्ण मीडिया यह सवाल कर रही है कि वह कवरेज के नाम पर वहाँ क्यों जाती हैं? नाम यूट्यूबर का है, लेकिन काम विरोध करने का है। संविधान ने सबको अपनी बात करहने का अधिकार दिया है।