सकारात्मकता एवं नकारत्मकता के आइने में वर्ष 2025

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रिटर्न की आशा ने निवेशकों के लिये अच्छे अवसर परोसे

                  मोहम्मद कमऱ खां

यह कि संरचित एवं सुनियोजित समीक्षा वह प्रक्रिया है, जो हमें उपलब्धियों का जश्न मानने, सुधार हेतु क्षेत्रों को चिहिन्त करने तथा अन्तर्दष्टि प्राप्त करने की अनुमति देती है। वर्ष के अन्त में आत्मचिन्तन करना बीते समय का जायज़ा लेते हुए अपने अनुभवों को समझना, उनसे कुछ सीखने का एक सुअवसर है। 31 दिसम्बर हमारे लिये एक अध्याय की समाप्ति के साथ-साथ नये ज्ञान और स्पष्टता एक नया अध्याय आरम्भ करने का सुअवसर है। इस तिथि तक हम 365 दिनों का जीवन जी चुके होते है। हमने इस दौरान कई उतार-चढ़ाव देखे, बीच बीच में कुछ सीखने के पल भी हमें प्राप्त हुये इन सभी पर विचार किये बगैर, हम अपने जीवन के अनुभवों का सदुपयोग करने में शायद ही सफल हो पाये। इस प्रकार की जाने वाली वार्षिक समीक्षा से हम लाभान्वित हो सकते है साथ ही अगले वर्ष अपनी कार्यप्रणाली में समुचित सुधार भी ला सकते है।
वर्ष 2025 की कुछ सकारात्मक घटनाएं, अन्तरिक्ष अन्वेषण- नासा तथा चीन के वियानवेन, 2- ब्रहम्मांड के विषय में हमारी समझ में वृद्धि की। तकनीकी प्रगति : आर्टिफिाशियल इन्टेलीजेन्स बायोटेक्नोलोजी (जैसे जीन एडिटिंग) एवं रोबोटिक्स में प्रगति से स्वास्थ्य और जीवन में सुधार की सम्भावनाएं बढ़ीं। वैश्विक आयोजन : टैरिफ़ और वैश्विक दबाव के बीच हमारे देश ने अपनी अर्थव्यवस्था में ताकत दिखाई। निवेश-निश्चित आय (ब्रान्ड) के अन्तर्गत मजबूत रिटर्न की आशा ने निवेशकों के लिये अच्छे अवसर परोसे। ईरान-इजराइल तनाव-2025 के पूर्वाद्र्ध में बढ़ते तनाव ने मध्य पूर्व को चिन्ता में डाल दिया 12 दिनों के टकराव के बाद एक युद्ध विराम पर सहमति बनी। खेलो में सफलता-भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार प्ब्ब् महिला वन डे वल्र्ड कप जीता। डोनाल्ड ट्रम्प ने जनवरी 2025 में संयुक्त राज्य अमेरिकासे 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। कुछ मानों में आर्थिक विकास-शेयर बाजार (बीएसई, सेंसेक्स, निफ्टी 50) रिकार्ड ऊंचाइयों पर पहुंचा तथा हमारे देश ने नये मुक्त व्यापार समझौते किये। आई ये अब देश के प्रति नकारात्मकता पर नजर डाले।

प्रयागराज के महाकुम्भ में दुर्भाग्यवश ’भगदड़ जैसा घटनाक्रम

नकारात्मक पक्ष-भू-राजनीतिक तनाव : भारत पाकिस्तान के मध्य अन्य सैन्य संघर्ष एवं अमरीका की कथित मध्यस्थता तथा अमरीका द्वारा लगाये जाने वाले टैरिफ ने वैश्विक व्यापार के अतिरिक्त अन्य आपूर्ति श्रंखलाओं को बाधित किया। इसके अतिरिक्त यूक्रेन-रूस जैसें संघर्षो ने वैश्विक अस्थिरता में वृद्धि की। सामाजिक मुद्दे : स्वचालन में नौकरियों से पृथकता/असम्बद्वीकरण का खतरा बढ़ा। आर्थिक चुनौतिंयों-अमरीका की टैरिफ ने भारतीय निर्यात को प्रभावित किया, इस प्रकार रूपया एतिहासिक रूप से निचले स्तर पर गिरा, जबकि सोने का मूल्य रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया। पर्यावरण और प्राकृतिक आपदाएं-अपने देश में 110 वर्षो की सबसे भीषण ठण्ड का सहज अनुमान तथा प्रयागराज के महाकुम्भ में दुर्भाग्यवश ’भगदड’ जैसा घटनाक्रम, जिसने कई लोगों की जीवन लीला समाप्त कर दीं, अवाँछित रूप से वीभत्स एवं दु:खद रही। आटोमेशन की नकारात्मकता तथा आटोमेशन के कारण नौकरियों पर ख़तरा बढ़ा, गलत सूचना का प्रसार हुआ साथ ही डिजिटल वल्र्ड के फलस्वरूप मानसिक स्वास्थ्य पर दवाब बढ़ा। अहमदाबाद विमान हादसा-12 जून, 2025 को अहमदाबाद में एअर इण्डिया का बोइंग 787 ड्रीम लाइनर विमान, दुर्घटना ग्रस्त हो गया। इस भयावह दुर्घटना में 241 यात्रियों की मौत हो गयी, जबकि एक यात्री चमत्कारिक रूप से बच गया। मृतकों में भारतीयों के साथ साथ विदेशी नागरिक भी शामिल थे। यह हादसा पूरे देश के लिए गहरे शोक का कारण बना। दिल्ली लाल किला आंतकी हमला-19 नवम्बर, 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुये आंतकी धमाके ने राजधानी की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिये।

इस हमले में 12 लोगों की मौत हो गयी। पहलगाम आंतकी हमले तथा ’आपरेशन सिन्दूर’ जैसी घटनाओं ने क्षेत्र मे तनाव में वृद्धि की और दक्षिण एशिया में ’प्रदूषण’ की समस्या जोड़ दी। भारत में राजनीतिक घटनाक्रम के अन्तर्गत उपराष्ट्रपति के त्यागपत्र के पश्चात, बिहार मे वोटर लिस्ट विवाद जैसी घटनाओं ने देश को राजनीतिक प्रभावित किया। हमारे देश में गत 22 सितम्बर, 2025 को नई जीएसटी दरें लागू की गयी, जिससें अर्थव्यवस्था में सुधार की आशा थी। अन्य उल्लेखनीय घटनाओं में ’आपरेशन सिन्दूर’ जैसी सैन्य गतिविधियों ने क्षेत्र में सुर्खियां बटोरीं। इसके अतिरिक्त 122 वर्षो बाद दुलर्भ चन्द्र ग्रहण (ब्लड मून) देखा गया, जिसका प्रभाव चर्चा में रहा। फेडरन रिजर्व की नीतियां:- पेरोम पावेल ने ब्याज दरों में प्रबन्धन से, वैश्विक वित्तीय स्थिरता को कुप्रभावित किया।’आइये’ अब वर्ष 2025 के सरकारी सुधारों का पुनरावलोकन करते है, महत्वपूर्ण भारतीय सरकारी नीतियों पर यदि विचार करें जो अपने 2025 कार्यान्वयन लक्ष्यों से चूक गईं वे म्च्थ्व् सुधार से लेकर श्रम सहिताओं एवं डिजिटल विनियमन से सम्बन्धित है। 2025 में भारतीय सरकार ने नये श्रम कानून से लेकर डिजिटल विनियमन तक कई उच्च प्रभाव वाले सुधारों को आगे बढ़ाया, हालांकि सभी नीतिगत वादे जमीनी स्तर पर क्रियान्वित नहीं हो सके। कुछ प्रमुख सुधार कमजोर रहे, विलम्बित हैं अथवा परामर्श स्तर पर अब भी अटके हुये है। ये नीतिगत ’चूकें’ नागरिकों निवेशकों व्यसायियों हेतु महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लिक्विडिटी, प्रतिस्पर्धा अनुपालन लागत वृद्धि की दृश्यता को प्रभावित करती है। साथ ही 2025 की मूल समय सीमाओं से प्रमुख नीति उपक्रमों का पीछे रह जाना निश्चित रूप से चिन्तनीय है। 2025 हेतु डिजिटल प्रतिस्पर्धा विधेयक ’ससंद में आगे बढऩे के बजाय परामर्श स्तर पर ही अटका रहा। मसौदा अत्याधिक प्रतिबन्धात्मक होने तथा नवाचार को हानि पहुँचाने की चिन्ताओं के उपरान्त, सरकार ने आगे के बाजार-अध्ययन कराये जाने का निर्णय लिया।

परिणाम स्वरूप 2025 में हमारा देश मे एक्स-एंटीडिजिटल प्रतिस्पर्धा नियमो को पेश करने में चूक हुयी, जिससें वैश्विकी टेक फार्मेा एवं घरेलू स्र्टाटअप्स के लिये नियमाकीय अनिश्चितता बनी हुयी है। जबकि पूर्व के ’विजन 2025’ लक्ष्यों से जुड़े कई सामाजिक-आर्थिक लक्ष्य भी अधूरे रहे गये। जहां 2025 में भारत सरकार की नीतिगत मंशा महत्वपूर्ण रही वही क्रियान्वयन की कमियां और खामियां उभर कर सामने आयी सुधार मे देरी, श्रम संहिता का आंशिक कार्यान्वयन डिजिटल नियमन में ठहराव तथा सामाजिक बुनियादी ढाँचा लक्ष्यों का अधूरा रहना, यह दर्शाता है कि घोषणाओं को कार्रवाई में परिवर्तित करना चुनौती पूर्ण रहा।

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